भीषण गर्मी में परीक्षा देने मजबूर छात्र-छात्राएं, निजी कॉलेजों की टाइमिंग पर उठे सवाल

भीषण गर्मी में परीक्षा देने मजबूर छात्र-छात्राएं, निजी कॉलेजों की टाइमिंग पर उठे सवाल

 

43 डिग्री तापमान के बीच सुबह 10 से शाम 5 बजे तक परीक्षाएं, अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी

 

परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद :छत्तीसगढ़ में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग द्वारा लोगों को अत्यधिक गर्मी और लू से बचने के लिए दोपहर के समय घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जा रही है। वहीं गरियाबंद जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा भी आम नागरिकों से अनावश्यक रूप से धूप में बाहर नहीं निकलने की अपील की जा रही है। जिले में तापमान लगभग 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की बात सामने आ रही है, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

एक ओर शासन-प्रशासन लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के कई निजी कॉलेजों में इसी भीषण गर्मी के दौरान परीक्षा आयोजित किए जाने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जानकारी के अनुसार कई प्राइवेट कॉलेजों में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। ऐसे में छात्र-छात्राओं को तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच परीक्षा केंद्र तक पहुंचना पड़ रहा है।

दोपहर के समय तापमान अपने चरम पर रहता है, जिससे विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्र-छात्राओं की स्थिति और भी कठिन बताई जा रही है। कई विद्यार्थियों को लंबी दूरी तय कर परीक्षा केंद्र पहुंचना पड़ता है। परिवहन व्यवस्था और पर्याप्त छायादार इंतजाम नहीं होने के कारण छात्र-छात्राएं लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं के खतरे में हैं।

अभिभावकों ने भी परीक्षा समय में बदलाव की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब प्रशासन स्वयं लोगों को दोपहर में घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रहा है, तब ऐसे समय में परीक्षाएं आयोजित करना विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ जैसा प्रतीत होता है। अभिभावकों ने मांग की है कि परीक्षाओं का समय सुबह जल्दी या शाम के समय रखा जाए, ताकि विद्यार्थियों को राहत मिल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा संस्थानों को छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए मौसम की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। वर्तमान स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर उचित दिशा-निर्देश जारी करने की अपेक्षा की जा रही है।

भीषण गर्मी के बीच परीक्षा देने जा रहे छात्र-छात्राओं की परेशानी अब चर्चा का विषय बनती जा रही है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग और कॉलेज प्रबंधन विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाते हैं।







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