कुदरत के करीब जिंदगी, बर्फीली हवाओं के बीच भी एक्टिव रहने का अंदाज और हर मौसम में सेहत को संभालने की आदत, ये नॉर्डिक देशों की असली पहचान है। पिछले दो तीन दिनों से ये नॉर्डिक कंट्रीज इसलिए भी चर्चा में हैं, क्योंकि नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी की फिनलैंड-नॉर्वे-स्वीडन-डेनमार्क-आइसलैंड के पीएम से अहम मुलाकात हुई और बात सिर्फ कारोबार की नहीं हुई। बात हुई जिंदगी को बेहतर बनाने की और सेहत को मजबूत करने की भी है। नॉर्डिक मॉडल की सबसे बड़ी सीख भी है। कम दिखावा, प्रॉपर डिसिप्लिन, काम के साथ-साथ परिवार और आउटडोर एक्टिविटी के लिए वक्त देते हैं। मतलब पैदल चलना, साइकिल चलाना, साफ हवा में रहना और मौसम जैसा भी हो शरीर को एक्टिव रखना है। यही वजह भी है कि नॉर्डिक देशों को खुशहाली और हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए दुनिया में अलग पहचान मिली है।
इसी पहचान के साथ एक और पहचान जल्दी ही जुड़ने वाली है। नॉर्डिक कंट्री स्वीडन में साइंटिस्ट्स ने लैब में ऐसी टिश्यूज तैयार की हैं जो शरीर में जाकर इंसुलिन बना सकती हैं। लैब में तैयार इन टिश्यूज को बकायदा डायबिटीज वाले चूहों पर टेस्ट भी किया गया। जिसने कई महीनों तक चूहों के ब्लड शुगर को नॉर्मल रखा। सोचिए अगर आगे इंसानों में भी ये तकनीक सफल रही तो टाइप-1 डायबिटीज के पेशेंट को बार-बार इंसुलिन इंजेक्शन लेने की जरुरत नहीं पड़ेगी। वैसे भी इन दिनों शुगर पेशेंट की मुसीबत कुछ ज्यादा बढ़ गई है। तेज गर्मी में डिहाइड्रेशन से शुगर फ्लक्चुएशन का रिस्क बढ़ गया है। ऐसे में नॉर्डिक देशों की तरह नेचर के करीब रहना, रोज थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी करना, हेल्दी डाइट लेना और शरीर को मौसम के हिसाब से संभालना बहुत जरूरी है। योगगुरु स्वामी रामदेव से जानते हैं शुगर कंट्रोल के साथ सही तरीके से जीवन जीने की कला।
डायबिटीज के लक्षण
डायबिटीज से खतरा
डायबिटीज से हार्ट का कनेक्शन
शुगर होगी कंट्रोल

Comments