अंबिकापुर : ई-वे बिल जांच के दौरान जीएसटी अधिकारियों के साथ अभद्रता और शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामले में नया मोड़ आ गया है। विभागीय कार्रवाई और कानूनी दबाव के बीच संबंधित व्यापारी ने लिखित रूप से बिना शर्त माफी मांग ली है।
जानकारी के अनुसार, 21 मई 2026 को जीएसटी विभाग के अधिकारी ई-वे बिल की नियमित जांच कर रहे थे। इसी दौरान कुछ व्यक्तियों द्वारा जांच कार्य में बाधा उत्पन्न की गई। आरोप है कि अधिकारियों के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया। इतना ही नहीं, विभाग द्वारा जांच के लिए वैध रूप से कब्जे में लिए गए वाहन (CG14 MR2640) को भी जबरन छुड़ाकर ले जाया गया। इस पूरे घटनाक्रम में व्यापारी मोहित जैन, प्रदीप सोनी और उनके सहयोगियों की भूमिका सामने आई थी।
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मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य कर अधिकारी संघ ने 28 मई को घटना की कड़ी निंदा की और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी। साथ ही संबंधित व्यापारी फर्म एम/एस एम एंड टी एजेंसी, अंबिकापुर के खिलाफ जीएसटी अधिनियम की धारा 67 के तहत विभागीय जांच और आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई।
अधिकारी संघ के सख्त रुख और संभावित कानूनी कार्रवाई को देखते हुए संबंधित व्यापारी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 29 मई को लिखित रूप से बिना शर्त माफीनामा प्रस्तुत किया। व्यापारी ने पूरे घटनाक्रम पर खेद व्यक्त करते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न होने का आश्वासन दिया है।


इधर, छत्तीसगढ़ राज्य कर अधिकारी संघ ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संघ ने यह भी कहा कि फील्ड ड्यूटी के दौरान जीएसटी अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे बिना किसी भय और दबाव के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
अधिकारी संघ का कहना है कि राजस्व हित से जुड़े मामलों में कार्यरत अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना शासन-प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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