गरियाबंद, 23 जून 2026 :कलेक्टर बी.एस. उइके की अध्यक्षता में आज जिला कार्यालय के सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) प्रबंधकारिणी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर, अपर कलेक्टर पंकज डाहिरे, जिला पंचायत के उप संचालक श्रीतमी पद्मनी हरदेल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जिला खनिज संस्थान न्यास अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर श्री उइके ने खनिज प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक एवं उपयोगी कार्यों के प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित डीएमएफ वार्षिक कार्ययोजना के तहत लगभग 21 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न विकास कार्यों पर व्यय की जाएगी। इनमें उच्च प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति के लिए 1 करोड़ 50 लाख रूपये, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदुषण नियंत्रण उपाय के लिए 70 लाख रूपये, स्वास्थ्य के लिए 3 करोड़ रूपये, शिक्षा क्षेत्र के लिए 3 करोड़ रूपये, महिला एवं बाल विकास के लिए 1 करोड़ रूपये, वृद्धजन एवं दिव्यांग जन कल्याण के लिए 1 करोड़ रूपये, कौशल विकास एवं आजीविका सृजन के लिए 50 लाख रूपये, स्वच्छता के लिए 50 लाख रूपये, आवास के लिए 20 लाख रूपये, कृषि के लिए 3 करोड़ 10 लाख रूपये, पशुपालन के लिए 50 लाख रूपये आबंटित की गई है। इसी प्रकार अन्य प्राथमिकता में भौतिक अधोसंरचना के लिए 4 करोड़ रूपये, सिचाई के लिए 70 लाख रूपये, ऊर्जा वाटर एवं शेड निर्माण के लिए 1 करोड़ रूपये तथा अन्य के लिए 30 लाख रूपये आबंटित की गई है।
कलेक्टर ने बताया कि कुल निधि का 70 प्रतिशत हिस्सा उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जैसे पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, महिला एवं बाल विकास, वृद्ध एवं दिव्यांगजन, कौशल विकास तथा आजीविका, स्वच्छता, आवास, कृषि, पशुपालन संवर्धन संबंधी कार्यों के लिए प्रस्तावित किया गया है। वहीं शेष 30 प्रतिशत राशि अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों जैसे भौतिक अधोसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा एवं वाटर शेड निर्माण एवं अन्य जनसुविधाओं के विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी। कलेक्टर श्री उइके ने कहा कि डीएमएफ निधि का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए किया जाए, ताकि खनिज प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार हो।
पेयजल आपूर्ति, पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण के अंतर्गत वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण तथा जल स्रोतों के संवर्धन संबंधी कार्यों पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य क्षेत्र में जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के जीर्णाेद्धार, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। शिक्षा क्षेत्र में स्कूलों के जीर्णाेद्धार, फर्नीचर एवं शैक्षणिक उपकरणों की खरीद, पुस्तकालय और प्रयोगशाला निर्माण सहित अधोसंरचना विकास के कार्यों पर चर्चा हुई। इसके अलावा आदिवासी आश्रमों एवं छात्रावासों के निर्माण तथा उन्नयन संबंधी प्रस्तावों की भी समीक्षा की गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत सुपोषण कार्यक्रम, प्रसूता एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता एवं विशेष कार्यक्रमों के आयोजन पर विचार किया गया। वहीं कौशल विकास एवं आजीविका संवर्धन के तहत युवाओं एवं महिलाओं के लिए रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, आय सृजन गतिविधियों तथा जीविकोपार्जन के अवसर बढ़ाने संबंधी योजनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में स्वच्छता, सामुदायिक विकास एवं अन्य जनहितकारी कार्यों को भी कार्ययोजना में शामिल करने पर जोर दिया गया। कलेक्टर श्री उइके ने कहा कि डीएमएफ की राशि का उपयोग जिले के खनिज प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने तथा आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए प्राथमिकता के साथ किया जाए।

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