खैरागढ़ : छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। जिले के ग्राम मुढ़ीपार में एक पुरुष का आवेदन योजना के तहत स्वीकृत हो गया और उसके खाते में करीब एक वर्ष तक योजना की राशि जमा होती रही। मामले के सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, तिलोक साहू के नाम से महतारी वंदन योजना में आवेदन किया गया था। ऑनलाइन रिकॉर्ड में आवेदक का नाम तिलोक साहू दर्ज था, जबकि पति के नाम वाले कॉलम में भी तिलोक साहू ही लिखा गया था। इसके बावजूद आवेदन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर स्तर की जांच में स्वीकृत हो गया।
योजना के नियमों के अनुसार इसका लाभ केवल पात्र महिलाओं को दिया जाता है। ऐसे में एक पुरुष का आवेदन दो स्तर की जांच के बाद भी स्वीकृत होना विभागीय सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित खाते में लगभग 12 माह तक भुगतान दर्शाया गया है। हालांकि, एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना, खैरागढ़ ने 3 जुलाई 2026 को बैंक को पत्र जारी कर 10 हजार रुपये शासन के खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए। वर्तमान में आवेदन की स्थिति 'परमानेंट होल्ड' दिखाई जा रही है और लाभ त्याग का अनुरोध भी स्वीकृत बताया गया है।
'ट्रायल के लिए आवेदन किया था' : तिलोक साहू
तिलोक साहू का कहना है कि वह एक सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालित करता है। योजना शुरू होने के शुरुआती दौर में पोर्टल की प्रक्रिया समझने और परीक्षण (ट्रायल) के उद्देश्य से उसने स्वयं आवेदन किया था। उसके अनुसार, उसके खाते में 10 हजार रुपये आए थे, जिन्हें विभाग की कार्रवाई के बाद वापस जमा करा दिया गया।
वहीं परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित राशि की रिकवरी कर ली गई है। अन्य तथ्यों की जानकारी रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद उपलब्ध कराई जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस आवेदन में पहली नजर में स्पष्ट त्रुटि दिखाई दे रही थी, वह दो स्तर के सत्यापन के बाद भी कैसे स्वीकृत हो गया। यह मामला विभागीय जांच और जवाबदेही की मांग को और मजबूत करता है।

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