₹1.86 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, उत्तराखंड से दिल्ली तक पहुंची खैरागढ़ पुलिस; दो आरोपी गिरफ्तार

Spread the love

खैरागढ़:  छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में 1 लाख 86 हजार 600 रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक पहुंची। एडिशनल एसपी रूपेश कुमार दांडे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले का खुलासा करते हुए बताया कि कथित तौर पर बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम निकालने और उसे आगे पहुंचाने के लिए किया जा रहा था।

कमीशन के लालच में बैंक खाते लेने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में बैंक खातों के इस्तेमाल के बदले कमीशन देने का लालच दिया जाता था। खाते में ठगी की रकम आने के बाद उसे निकालकर दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाया जाता था। आरोप है कि एक व्यक्ति रकम निकालने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन रखता था, जबकि दूसरा भारतीय मुद्रा को डॉलर में बदलने का काम करता था।

मामले की शुरुआत गातापार थाना क्षेत्र के निवासी राकेश कुमार भोक्ते की शिकायत से हुई। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों से अलग-अलग तारीखों में कुल 1,86,600 रुपये निकल गए थे।

तीन अलग-अलग लेनदेन में निकली रकम

शिकायत के अनुसार, 16 अगस्त 2026 को राकेश कुमार भोक्ते के आईडीबीआई बैंक, दाउचौरा खैरागढ़ स्थित खाते से 99 हजार रुपये निकाले गए। इसी दिन उनकी पत्नी सावित्री बाई भोक्ते के छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की पाड़ादाह शाखा स्थित खाते से 80 हजार रुपये निकल गए। इसके बाद 1 सितंबर 2026 को एचडीएफसी बैंक, खैरागढ़ स्थित खाते से 7,600 रुपये निकाले जाने की शिकायत की गई।

शिकायत के आधार पर खैरागढ़ थाने में अपराध क्रमांक 338/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66D में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

बैंक खातों की जानकारी से उत्तराखंड पहुंची पुलिस

जांच के दौरान बैंक केवाईसी समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस टीम उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के झनकईया थाना क्षेत्र पहुंची। वहां तारादेवी से पूछताछ की गई।

पुलिस के मुताबिक, तारादेवी ने बताया कि उज्जवल सिंह दानू ने जून 2026 में बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले 5 हजार रुपये देने की बात कही थी। इसके बाद उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक और यूनियन बैंक के खाते एटीएम कार्ड सहित उसे दे दिए।

पुलिस ने तारादेवी के कब्जे से दोनों बैंकों की पासबुक और सैमसंग कंपनी का एक मोबाइल फोन जब्त किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें नोटिस देकर जांच में सहयोग करने को कहा गया और सुपुर्दनामा पर छोड़ा गया।

ये भी पढ़े :सरगुजा में दशहरे की रात पत्नी की हत्या का आरोप, वारदात के बाद पति फरार

रकम निकालकर 10 प्रतिशत कमीशन रखने का आरोप

पुलिस के अनुसार, उज्जवल सिंह दानू ने पूछताछ में बताया कि बैंक खाते में रकम जमा होने का संदेश मिलने पर वह बैंक जाकर पैसे निकालता था। इसके बाद रकम का 10 प्रतिशत अपने पास रखकर बाकी पैसे सतविंदर सिंह को दे देता था।

पुलिस ने उज्जवल के कब्जे से कथित कमीशन के 10 हजार रुपये नकद और पंजाब एंड सिंध बैंक की जमा पावती की छायाप्रति जब्त की। जांच में अपराध से संबंधित साक्ष्य मिलने के आधार पर उसे 17 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली से सतविंदर सिंह गिरफ्तार

जांच की अगली कड़ी में पुलिस टीम दिल्ली पहुंची, जहां से 27 वर्षीय सतविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में उसने ठगी से प्राप्त भारतीय मुद्रा को डॉलर में बदलने की बात बताई। उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन जब्त किया गया।

पुलिस ने सतविंदर को 18 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड लिया गया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। मामले में आगे की विवेचना जारी है।

बैंक खाता दूसरों को देना पड़ सकता है भारी

साइबर अपराधों में कई बार दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। ऐसे खातों को आम तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। कमीशन के लालच में बैंक खाता, एटीएम कार्ड या बैंकिंग सुविधाएं किसी दूसरे व्यक्ति को देना खाताधारक को भी पुलिस जांच के दायरे में ला सकता है।

इसलिए अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल करने न दें। खाते में संदिग्ध रकम आने पर उसे निकालकर किसी दूसरे को सौंपने के बजाय तुरंत बैंक को सूचित करें।

साइबर ठगी होने पर कहां करें शिकायत?

अगर खाते से बिना अनुमति पैसे निकल जाएं, तो तुरंत बैंक को सूचना दें और साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत की जा सकती है। लेनदेन के संदेश, बैंक स्टेटमेंट और अन्य संबंधित साक्ष्य सुरक्षित रखें। शीघ्र शिकायत से रकम के आगे हस्तांतरण को रोकने में मदद मिल सकती है, हालांकि पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *