मुखिया के मुखारी – स्वहित में -सत्ता क्या कलम के रंग भी बेरंग हो जाते है…
मुखिया के मुखारी – स्वहित में -सत्ता क्या कलम के रंग भी बेरंग हो जाते है…
मोर गांव अउ तोर सहर के खबर, छत्तीसगढ़ के हर गढ़ के खबर
मुखिया के मुखारी – स्वहित में -सत्ता क्या कलम के रंग भी बेरंग हो जाते है…
मुखिया के मुखारी – जैसे -जैसे बढ़ रहा पूजन वैसे -वैसे बढ़ रहा मुंह का सुजन
मुखिया के मुखारी – बेल वाली टीम में अमरबेल शामिल हो गए
मुखिया के मुखारी – सुशासन दिखना भी चाहिए…..
मुखिया के मुखारी –सर्वोच्च न्यायालय की सर्वोच्चता हर हाल में बनी रहे…
मुखिया के मुखारी – नीति कुनीति के शोर के बीच -जीत किसके ओर है?
मुखिया के मुखारी – कारिंदों ,आकाओं, घोटालेबाजों को हर घोटाले की सजा दीजिए
मुखिया के मुखारी – इच्छा होगी जनता की तों आपको परीक्षा में पास करेगी
मुखिया के मुखारी – “अधजल गगरी छलकत जाए, पूरी गगरिया चुपके जाए”