चिंतागुफा से आई पुलिस की मार्मिक तस्वीर, शहादत की धरती पर दिखा खाकी का मानवीय चेहरा

Spread the love

 

‘निवा दुवाड़ ते’ अभियान के जरिए गांव-गांव पहुंच रही सुकमा पुलिस, संवाद से मजबूत हो रहा ग्रामीणों का भरोसा

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/सुकमा : नक्सल प्रभावित और शहादत की धरती के रूप में पहचाने जाने वाले सुकमा जिले से पुलिस का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आया है, जिसने वर्दी और ग्रामीणों के बीच भरोसे की नई तस्वीर पेश की है। चिंतागुफा क्षेत्र में सुकमा पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘निवा दुवाड़ ते’ अभियान के तहत पुलिसकर्मी गांव-गांव पहुंचकर ग्रामीणों से सीधे संवाद कर रहे हैं, उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और समाधान की दिशा में पहल कर रहे हैं।
‘निवा दुवाड़ ते’ स्थानीय बोली में ‘आपके द्वार’ के अर्थ को दर्शाता है। अभियान का मूल उद्देश्य पुलिस को ग्रामीणों के करीब ले जाना और थाने अथवा पुलिस कार्यालय तक पहुंचने में असमर्थ लोगों की समस्याओं को उनके गांव तक पहुंचकर समझना है। इस पहल के जरिए पुलिस केवल कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि ग्रामीणों के सुख-दुख में सहभागी बनकर विश्वास का रिश्ता मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

गांवों में पहुंचकर सुनी जा रही लोगों की पीड़ा
अभियान के तहत पुलिस की टीम गांवों में पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत कर रही है। ग्रामीणों से उनकी व्यक्तिगत एवं सामुदायिक समस्याओं की जानकारी ली जा रही है। गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, राशन सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को भी चिन्हित किया जा रहा है, ताकि संबंधित विभागों और प्रशासन तक उनकी जानकारी पहुंचाकर समाधान की दिशा में पहल की जा सके।पुलिस का मानना है कि दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों तक शासन-प्रशासन की योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी पहुंचाना भी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से ग्रामीणों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है और पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने की दिशा में सहयोग किया जा रहा है।

ये भी पढ़े :दिव्यांग बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, संकल्प सेवा संस्थान में हर्षोल्लास से मना स्वतंत्रता दिवस

शिकायतों के त्वरित निराकरण पर जोर
‘निवा दुवाड़ ते’ अभियान के माध्यम से ग्रामीणों की शिकायतों और समस्याओं को सुनकर उनके त्वरित एवं प्रभावी निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों और जवानों द्वारा ग्रामीणों से सहज माहौल में संवाद स्थापित किया जा रहा है, ताकि लोग बिना किसी संकोच के अपनी बात पुलिस के सामने रख सकें।इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच बनी दूरी को कम किया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में आपसी संवाद और विश्वास को मजबूत करना सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

‘विश्वास का रिश्ता, संवाद के साथ’
सुकमा पुलिस ने इस अभियान का संदेश ‘विश्वास का रिश्ता, संवाद के साथ’ रखा है। यह संदेश पुलिस की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें ग्रामीणों के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने के लिए संवाद को सबसे महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।पुलिस अधीक्षक सुकमा मयंक गुर्जर के मार्गदर्शन में समाजहित से जुड़े विभिन्न अभियानों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ‘निवा दुवाड़ ते’ भी इसी सोच का हिस्सा है, जिसके माध्यम से पुलिस लगातार गांवों तक पहुंचकर जनसंवाद स्थापित कर रही है।

खाकी के मानवीय चेहरे की तस्वीर
चिंतागुफा से सामने आई यह तस्वीर इस बात का संदेश देती है कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध नियंत्रण और सुरक्षा तक सीमित नहीं है। जब वर्दीधारी जवान ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनते हैं, उनकी पीड़ा समझते हैं और समाधान के लिए प्रयास करते हैं, तो इससे पुलिस के प्रति विश्वास का भाव मजबूत होता है।

सुकमा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ‘निवा दुवाड़ ते’ अभियान पुलिस और ग्रामीणों के बीच संवाद की एक नई कड़ी बनता दिखाई दे रहा है। गांव-गांव पहुंचकर लोगों की बात सुनना, उनकी समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाना और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग करना इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता है।ऐसे प्रयासों से निश्चित रूप से खाकी का मानवीय चेहरा सामने आता है और सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ विश्वास एवं सामाजिक समरसता की नींव भी मजबूत होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *