समस्याएं वाकई बहुत सी रही है हमारे देश में,सवाल यह है कि सालों से व्यवस्था बदली क्यूँ नहीं ?

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इस सवाल का जवाब खोजने का प्रयास 125 करोड़ की आबादी ने कभी की ही नहीं…

 

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : आज जब इस सड़ी_गली व्यवस्था से बहुत ज्यादा गंध आनी शुरू हो गई है,तब कुछ लोगों ने प्रयास करना शुरू कर दिया है,, उन्हें लगने लगा है कि अब बस बहुत हो गया है।। हमने और ज्यादा लापरवाही या अंदेखियां की तो वर्तमान व्यवस्था की जिस सड़न ने हमारा भूत और वर्तमान खा लिया है,वो भविष्य को भी पूरी तरह से निगल जाएगी।।भविष्य की सुरक्षित रखने का एक मात्र रास्ता व्यवस्था में बदलाव का प्रयास है।। और ये तभी संभव है जब देश की वर्तमान सरकार(सत्ता)इसके प्रति जवाबदेह और जिम्मेदार बनी रहे।। हालांकि ऐसा होता दिख नहीं रहा है।।

फिर भी ऐसे जागरूक वर्ग लोग जो समाज के सामने Gen z,,Gen अल्फा,Gen Y जैसे नाम लेकर सामने आए,,ऊनका प्रयास है कि व्यवस्था में बदलाव की शुरुवात देश की बुनियादी सरकारी शिक्षा व्यवस्था( प्राइमरी स्कूल) से कि जाए।। क्योंकि यदि बुनियादी शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी तभी उसके ऊपर के हालात बदले जा सकेंगे।।

यद्यपि देश का Gen Z वर्ग गांधीवादी तरीके से व्यवस्था में बदलाव की कोशिश कर रहा है। लेकिन सत्ता से संसद तक व्यवस्था में पकड़ रखने वाले साधन सम्पन्न और अपराधिक प्रवृति लोग जो नहीं चाहते कि देश की वर्तमान स्थिति में किसी भी तरीके का कोई बदलाव हो। इसलिए वो इन्हें “दिमागी नक्सल” या देशद्रोही का नाम दे रहे है।। ताकि इन्हें बदनाम कर इनका मनोबल तोड़ा जा सके।।

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उनकी सोच यह है कि यदि ये आम वर्ग के लोग व्यवस्था में बदलाव करने में किसी भी तरह से सफल हो जाते हैं, तो उनको और अधिक जवाबदेह होना पड़ेगा।। जबकि वे लोग अब तक बिना किसी जिम्मेदारी और जवाबदेही के ही बेखौफ सालों से 125 करोड़ से अधिक आम लोगों पर शासन करते आ रहे है। जो उनसे(सत्ता) कभी सवाल नहीं करते थे,न ही सत्ता को आंदोलन की चेतावनियाँ देते है।। बस कोल्हू की बैल की तरह खपते हुए वर्तमान स्थिति को ईश्वरी व्यवस्था मान लेते थे।।

ऐसे में करोड़ो दबे_कुचले शोषित लोगों के बीच से कुछ हिम्मत वाले लोग(युवा)अगर उठ खड़े हुए हैं तो व्यवस्था की बागडोर सम्हाल रहे क्रूर लोगों के हाथ_पांव फूलना स्वाभाविक है।वो चाहते है कि इन जागरूक लोगो को पहले पुलिस के डंडे से या फिर प्रशासन की सख्ती से और अंत में अपने पाले हुए समर्थकों की हिंसा से दबाया जाए।।नहीं तो कल इन मुट्ठी भर लोगों के पीछे बहुत बड़ी भीड़ खड़ी जाएगी।। जिनसे निपट पाना बड़ी से बड़ी सरकारी ताकत के बस की बात नहीं होगी।।

दिल्ली के बाद झारखंड बिहार और राजस्थान की घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है।। कि आपके कथित दिमागी नक्सल समूह ने आपसे सवाल पूछने के साथ_साथ आप(सरकार) में सुधार के प्रयास भी तेज कर दिए है।।इन सबके बाद भी अगर व्यवस्था नहीं बदल पाती है तो इसके पीछे का बड़ा कारण क्या होगा इसे समझने के लिए हमें गहन अध्ययन कर और भी जानने और समझने की आवश्यकता है।

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