राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थान IISER पुणे में बेमेतरा के 5 पीएमश्री शिक्षक हुए प्रशिक्षित

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 बेमेतरा टेकेश्वर दुबे : मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्देशन, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. कमलप्रीत सिंह, आयुक्त समग्र शिक्षा श्रीमती किरण कौशल के कुशल मार्गदर्शन तथा राज्य समन्वयक समग्र शिक्षा श्री आशीष गौतम के संयोजन में केंद्र शासन की महत्वाकांक्षी योजना पीएमश्री अंतर्गत “राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थानों में शिक्षकों के क्षमता संवर्धन कार्यशाला” का आयोजन भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER PUNE) के पुणे स्थित श्रीमती इंद्राणी बालन साइंस एक्टिविटी सेंटर में किया गया। चार दिवसीय इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के 100 शिक्षकों ने सहभागिता की। इनमें बेमेतरा जिले के पीएमश्री विद्यालयों के शिक्षक अमित कुमार वर्मा, ओमनारायण वर्मा, हिमांशी पाली, निर्मला देशमुख एवं कृष्णा कुमार वर्मा शामिल रहे। पीएमश्री सेजेस की शिक्षिका हिमांशी पाली ने दुर्ग संभाग का नेतृत्व किया।दुर्ग संभाग से कुल 17 शिक्षकों ने इस कार्यशाला में सहभागिता की।

पद्मश्री अरविंद गुप्ता ने शिक्षकों को दिया नवाचार और बाल-केंद्रित शिक्षा का संदेश

कार्यशाला के दौरान भारतीय विज्ञान शिक्षक, खिलौनों के आविष्कारक एवं लेखक पद्मश्री अरविंद गुप्ता का आगमन हुआ। उन्होंने छत्तीसगढ़ से अपने पुराने जुड़ाव को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने दल्ली राजहरा, बालोद, राजनांदगांव तथा मानपुर-मोहला जैसे क्षेत्रों में मजदूर अधिकारों के समर्थक शंकर गुहा नियोगी के साथ चार वर्षों तक कार्य किया है।

उन्होंने शिक्षकों को प्रचलित शिक्षा पद्धति से आगे बढ़कर बाल मनोविज्ञान के अनुरूप शिक्षा देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें आज तक कोई “खराब बच्चा” नहीं मिला, बल्कि कई बार हमारी शिक्षा व्यवस्था ही बच्चों को ऐसा बना देती है। उन्होंने गिजुभाई बधेका की ‘दिवास्वप्न’, ‘तोतो-चान’ के ट्रेन स्कूल (टोमोय गाकुएन) और समरहिल जैसे विद्यालयों की अवधारणा से प्रेरणा लेने की बात कही।

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पद्मश्री अरविंद गुप्ता ने कागज, प्लास्टिक स्ट्रॉ, धागे, दूध-जूस के टेट्रापैक, कोल्ड ड्रिंक के डिब्बे, माचिस की तीलियों तथा रद्दी कागज जैसी अनुपयोगी समझी जाने वाली सामग्री से वैज्ञानिक खिलौने बनाकर दिखाए। उन्होंने शिक्षकों को “कबाड़ से जुगाड़” की सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक स्वयं नवाचार और स्वच्छता का उदाहरण प्रस्तुत करें, क्योंकि बच्चे अपने शिक्षकों का अनुकरण करते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छा स्कूल वही है, जहां बच्चे आते समय खुशी से झूमते हुए आएं और जाते समय स्कूल छोड़ने का उनका मन न हो।

विज्ञान एवं गणित की चेतना विकसित करने पर जोर

कार्यशाला का उद्घाटन प्रोफेसर देवप्रिया चटोपाध्याय, डीन अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं जनसंपर्क, IISER पुणे तथा राज्य समन्वयक पीएमश्री समग्र शिक्षा श्री आशीष गौतम के संदेश के साथ हुआ। ट्रेनिंग समन्वयक अनुराग जॉन एवं भागवत साहू ने समग्र शिक्षा के संदेश तथा कार्यशाला की अपेक्षाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक एक बड़े उद्देश्य के साथ यह प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। कार्यशाला से प्राप्त ऊर्जा एवं अनुभवों को विद्यालयों तक पहुंचाकर विज्ञान एवं गणित के प्रति बच्चों में चेतना विकसित करने तथा व्यावहारिक एवं क्रियाशील शिक्षण के माध्यम से शिक्षा के नए दृष्टिकोण को विकसित करने पर जोर दिया गया।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और आधुनिक शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक एवं तार्किक चिंतन, नवाचार तथा आधुनिक शिक्षण-पद्धतियों के प्रति समझ एवं दक्षता का विकास करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न व्यावहारिक गतिविधियों, प्रयोगात्मक कार्यों तथा विषय-विशेषज्ञों द्वारा आयोजित विषय-वस्तु आधारित सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को समृद्ध एवं उपयोगी शैक्षणिक अनुभव प्रदान किया गया।

शिक्षकों को कक्षा-कक्ष में कंप्यूटेशनल थिंकिंग, कहानी के माध्यम से विषय-वस्तु को रोचक, प्रभावपूर्ण एवं जिज्ञासावर्धक बनाना, गतिविधियों के माध्यम से गणित को समझना, खिलौनों के माध्यम से विज्ञान को समझना, बदलाव का जादू एवं तर्क तथा गतिविधि-आधारित शिक्षण-पद्धति में मूल्यांकन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण शिक्षण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

विज्ञान केंद्र एवं ‘कल्पगृह’ का किया भ्रमण

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विज्ञान केंद्र पिंपरी-चिंचवड़  तथा IISER पुणे द्वारा स्थापित ‘कल्पगृह’ का भ्रमण किया। यहां शिक्षकों ने सरल एवं रोचक गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान से जुड़ी कठिन अवधारणाओं एवं भ्रांतियों को दूर करने के तरीकों को जाना। हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान एवं गणित की अवधारणाओं को बच्चों तक सहज ढंग से पहुंचाने के तरीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

शिक्षकों ने ऑटोमोबाइल उद्योग की बारीकियों को समझा तथा 3-डी मूवी के माध्यम से मनुष्य द्वारा प्रकृति को पहुंचाए जा रहे नुकसान की जानकारी प्राप्त की। तारांगण में दिन के समय तारों एवं ग्रह-नक्षत्रों का अवलोकन किया तथा दिशाओं की पहचान, सौरमंडल एवं खगोलीय घटनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

प्रशिक्षण में समग्र शिक्षा की टीम एवं IISER पुणे का रहा महत्वपूर्ण योगदान

प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल एवं सुचारू रूप से संचालित करने में अशोक रूपनर, सीनियर टेक्निकल ऑफिसर, अंकिश त्रिपुड़े एवं श्रीमती इंद्राणी बालन साइंस एक्टिविटी सेंटर, IISER पुणे की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ की ओर से ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर के रूप में अनुराग जॉन एवं भागवत साहू उपस्थित रहे।

यह राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला शिक्षकों के लिए विज्ञान एवं गणित को गतिविधि, प्रयोग और नवाचार के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण अनुभव सिद्ध हुई।

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