हर साल 300 विद्यार्थी, फिर भी कॉलेज नहीं! पीपरछेड़ी में नवीन शासकीय महाविद्यालय की मांग, राजधानी पहुंचा प्रतिनिधिमंडल

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परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद : गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्र पीपरछेड़ी में लंबे समय से महसूस की जा रही उच्च शिक्षा की कमी को दूर करने की मांग अब राजधानी रायपुर तक पहुंच गई है। क्षेत्र में नवीन शासकीय महाविद्यालय खोलने की मांग को लेकर पीपरछेड़ी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल राजधानी रायपुर पहुंचा और मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष सहित उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवेदन सौंपकर शिक्षा सत्र 2026-27 से पीपरछेड़ी में नवीन महाविद्यालय प्रारंभ करने की मांग की।प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि पीपरछेड़ी एवं आसपास का क्षेत्र वनांचल होने के कारण यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। क्षेत्र में महाविद्यालय नहीं होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक छात्र-छात्राएं बारहवीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते और मजबूरी में शिक्षा छोड़ देते हैं।

छात्र किसी तरह पहुंच रहे कॉलेज, छात्राओं के लिए दूरी बनी बड़ी बाधा
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि क्षेत्र के कुछ छात्र आर्थिक और अन्य कठिनाइयों के बावजूद जिला मुख्यालय अथवा अन्य स्थानों तक प्रतिदिन आना-जाना कर महाविद्यालयीन शिक्षा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। लेकिन ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र से आने वाली छात्राओं के लिए लंबी दूरी, आवागमन की समस्या और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण बारहवीं के बाद उच्च शिक्षा जारी रखना और भी मुश्किल हो जाता है।ऐसे में क्षेत्र में ही नवीन महाविद्यालय की स्थापना होने से छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और विशेषकर ग्रामीण एवं गरीब परिवारों की बेटियों को आगे की पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा।

हर वर्ष करीब 300 विद्यार्थी 12वीं के बाद उच्च शिक्षा की ओर
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार पीपरछेड़ी क्षेत्र के विभिन्न हायर सेकेंडरी स्कूलों से प्रतिवर्ष लगभग 300 छात्र-छात्राएं 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होते हैं। इन विद्यार्थियों के लिए क्षेत्र में महाविद्यालय नहीं होना उच्च शिक्षा के रास्ते में बड़ी बाधा बन रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने शासन के समक्ष इसी छात्र संख्या और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पीपरछेड़ी में नवीन महाविद्यालय खोलने की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा है।प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वनांचल एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना केवल शिक्षा का विस्तार नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम होगा। स्थानीय स्तर पर कॉलेज खुलने से विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के अवसरों के लिए भी बेहतर आधार मिल सकेगा।

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मुख्यमंत्री से लेकर उच्च शिक्षा विभाग तक सौंपा आवेदन
महाविद्यालय खोलने की मांग को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष तथा उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को आवेदन सौंपकर मामले में आवश्यक पहल करने का आग्रह किया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि पीपरछेड़ी क्षेत्र की आवश्यकता और विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए आगामी शिक्षा सत्र 2026-27 से नवीन महाविद्यालय प्रारंभ करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।प्रतिनिधिमंडल में लघु वनोपज सहकारी समिति गरियाबंद के अध्यक्ष कल्याण सिंह कपिल, भुंजिया समाज गरियाबंद के जिला अध्यक्ष ग्वाल सिंह, ग्राम पंचायत पीपरछेड़ी के सरपंच दीपेश दीवान, पूर्व जनपद सदस्य वीरेंद्र ठाकुर, ग्राम पंचायत लोहारी के सरपंच मुल सिंग ठाकुर, अधिवक्ता गोवर्धन नागेश, पूर्व सरपंच प्रताप सिंह नेताम, पत्रकार परमेश्वर राजपूत सहित अन्य लोग शामिल रहे।

अब क्षेत्रवासियों की नजर शासन के निर्णय पर टिकी है। यदि पीपरछेड़ी में नवीन महाविद्यालय की स्थापना होती है तो वनांचल क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा का रास्ता स्थानीय स्तर पर आसान हो सकेगा।पीपरछेड़ी में नवीन शासकीय महाविद्यालय की मांग, क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर जाने की मजबूरीनवीन शासकीय महाविद्यालय पीपरछेड़ी की स्थापना की मांग को लेकर क्षेत्र में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पीपरछेड़ी से संबंधित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फुलकर्रा, रूवाड़, रसेला, खम्हारीपारा सहित आसपास के अनेक गांव बिन्द्रानवागढ़ आरक्षित विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। इन क्षेत्रों में कमार, भुंजिया विशेष पिछड़ी जनजाति सहित अन्य पिछड़ा वर्ग एवं विभिन्न वर्गों के लोग निवासरत हैं।क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां, आवागमन के सीमित साधन एवं उच्च शिक्षा से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं का अभाव विद्यार्थियों के सामने बड़ी चुनौती है। जिला मुख्यालय से दूरी होने के कारण ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अनेक विद्यार्थी आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पीपरछेड़ी में नवीन शासकीय महाविद्यालय की स्थापना होती है तो आसपास के दर्जनों गांवों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की सुविधा स्थानीय स्तर पर मिल सकेगी। इससे विशेष पिछड़ी जनजाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।नवीन महाविद्यालय की स्थापना केवल एक शिक्षण संस्था खोलने का विषय नहीं, बल्कि वनांचल क्षेत्र में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने, बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण युवाओं को बेहतर भविष्य का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
इसी उद्देश्य को लेकर समिति द्वारा लगातार शासन-प्रशासन एवं संबंधित विभाग के समक्ष पीपरछेड़ी में नवीन शासकीय महाविद्यालय खोलने की मांग रखी जा रही है। समिति का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, विद्यार्थियों की संख्या, जिला मुख्यालय से दूरी तथा आवागमन की कठिनाइयों को देखते हुए शासन को इस मांग पर गंभीरता से विचार करते हुए महाविद्यालय की स्वीकृति प्रदान करनी चाहिए।

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