नेपाल : नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद नौवें दिन भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। तबाही प्रभावित इलाकों में सेना और पुलिस का सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। मलबे के नीचे से शव बरामद होने का सिलसिला जारी है और मृतकों का आंकड़ा 1,252 के पार पहुंच गया है।
भारत की एक्सपर्ट रेस्क्यू टीम भी राहत एवं बचाव अभियान में जुटी है। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल में लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच उन्हें बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
1252 शव बरामद, 4875 लोग अब भी लापता
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, बाढ़ प्रभावित विभिन्न जिलों से अब तक 1,252 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें रसुवा में 127, नुवाकोट में 177, धादिंग में 60, गोरखा में 69, तनहुं में 38, नवलपरासी पूर्व में 218, नवलपरासी पश्चिम में 208 और चितवन में 355 शव बरामद किए गए हैं।
प्राधिकरण के मुताबिक, आपदा के बाद अभी भी 4,875 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 11,993 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
ये भी पढ़े :मनेन्द्रगढ़ में कुत्तों का आतंक! एक महीने में 268 लोगों को काटा, रोजाना औसतन 9 बने शिकार
22 लाख टन से ज्यादा मलबा बना चुनौती
तबाही प्रभावित क्षेत्रों में भारी मात्रा में मलबा जमा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन इलाकों में 22 लाख टन से ज्यादा मलबा जमा होने का अनुमान है। इसी मलबे में दबे लोगों और शवों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार अभियान चला रही हैं।
बरामद शवों में से अभी बहुत कम की पहचान हो सकी है। वहीं, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल समेत कई स्थानों पर अब भी लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय सेना भी रेस्क्यू अभियान में जुटी
नेपाल की त्रासदी के बीच भारत लगातार राहत और बचाव कार्य में सहयोग कर रहा है। भारतीय सेना की विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम भी प्रभावित क्षेत्रों में अभियान में जुटी है और टनल में फंसे लोगों को बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
भारत ने भेजी राहत सामग्री की पांचवीं खेप
नेपाल के मुश्किल वक्त में भारत लगातार मदद पहुंचा रहा है। भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री की पांचवीं खेप भी भेजी गई है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भारत की सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है।
नेपाल में भारत की 10 टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। वहीं, प्रधानमंत्री बालेन शाह ने नेपाल में आई इस त्रासदी के लिए जलवायु परिवर्तन को भी एक प्रमुख कारण बताया है।




