हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भौम प्रदोष के दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन मंगल ग्रह से जुड़ी परेशानियों और कर्ज से मुक्ति के लिए कुछ विशेष उपाय करने की भी मान्यता है।
आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, भौम प्रदोष के दिन किए जाने वाले कुछ उपाय जीवन में सकारात्मकता, आर्थिक स्थिति और कार्यक्षेत्र से जुड़ी परेशानियों को दूर करने में सहायक माने जाते हैं। आइए जानते हैं भौम प्रदोष के दिन कौन-कौन से उपाय किए जा सकते हैं।
दांपत्य जीवन में बढ़ेगा प्रेम
अगर दांपत्य जीवन में उदासी या आपसी दूरी महसूस हो रही है और आप जीवनसाथी से मन की बात साझा नहीं कर पा रहे हैं, तो भौम प्रदोष के दिन सूखा नारियल और पीला सिंदूर लें। सिंदूर में थोड़ा चमेली का तेल मिलाकर नारियल पर स्वास्तिक बनाएं और इसे हनुमान जी के चरणों में अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे रिश्तों में सकारात्मकता बढ़ सकती है।
सकारात्मक ऊर्जा के लिए करें हनुमान चालीसा का पाठ
अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें और हनुमान जी को प्रणाम करें। इसके बाद कम से कम सात बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। माना जाता है कि इससे मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ता है।
कारोबार में स्थिरता के लिए
अगर कारोबार में लगातार नुकसान हो रहा है, तो भौम प्रदोष के दिन तीन मुखी रुद्राक्ष की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के बाद इसे धारण करने की मान्यता है। रुद्राक्ष धारण करने से पहले अपनी परंपरा के अनुसार उचित विधि और शुद्धता का ध्यान रखें।
कर्ज से मुक्ति के लिए
अगर आप कर्ज के बोझ से परेशान हैं, तो भौम प्रदोष के दिन आसन पर बैठकर हाथ जोड़ें और ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का 11 बार पाठ करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह उपाय कर्ज संबंधी परेशानियों में राहत देने वाला माना जाता है।
आर्थिक संकट से बचने के लिए
भविष्य में आर्थिक संकट और कर्ज लेने की स्थिति से बचने की कामना के लिए शाम के समय हनुमान मंदिर जाएं या घर पर हनुमान जी के सामने घी का दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें बूंदी का प्रसाद अर्पित कर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
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अटका हुआ पैसा वापस पाने के लिए
अगर किसी व्यक्ति के पास आपका पैसा लंबे समय से अटका हुआ है, तो भौम प्रदोष के दिन हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग लगाएं। इसके साथ मंगल मंत्र का 11 बार जाप करें—
मंत्र:
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।
बड़े भाई से रिश्ते मजबूत करने के लिए
बड़े भाई के साथ संबंधों में प्रेम और मधुरता बढ़ाने के लिए भौम प्रदोष पर मंगल यंत्र की स्थापना करने की मान्यता है। इसे धातु पर बने यंत्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
परंपरागत रूप से भोजपत्र पर अष्टगंध और अनार की कलम अथवा सफेद कागज पर लाल पेन से मंगल यंत्र बनाया जाता है। इसमें तीन पंक्तियों और तीन स्तंभों में निर्धारित अंक लिखे जाते हैं। इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’ मंत्र का जाप किया जाता है।
नोट: 31 हजार मंत्र जाप जैसी विस्तृत साधना करने से पहले किसी योग्य गुरु या विद्वान से विधि की जानकारी लेना उचित है।
नौकरी की परेशानी दूर करने के लिए
अगर नौकरी की तलाश में परेशानी आ रही है या मनचाही नौकरी नहीं मिल रही है, तो भौम प्रदोष के दिन हनुमान मंदिर में शहद की शीशी अर्पित करें। भगवान हनुमान के सामने अपनी मनोकामना रखें और नौकरी से जुड़ी परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करें।
सफलता के लिए जरूरतमंदों को खिलाएं मीठी रोटी
अपने कार्यों में सफलता की कामना के लिए भौम प्रदोष के दिन जरूरतमंद लोगों को मीठी रोटी बांटने की मान्यता है। इसे सेवा और दान के भाव से करना शुभ माना जाता है।
जीवन में संतुलन के लिए
जीवन में सुख-संतुलन बनाए रखने की कामना के लिए आटे में थोड़ा गुड़ मिलाकर उसके पुए बनाएं और गाय को खिलाएं। इसके साथ मंगल देव के मंत्र—
‘ॐ मंगलाय नमः’
का 51 बार जाप करें।
जीवन में मंगल की कामना के लिए
जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता की कामना से भौम प्रदोष के दिन किसी नाई या दर्जी को चॉकलेट भेंट करने की मान्यता बताई गई है। इसे जरूरतमंद या सेवा से जुड़े व्यक्ति की मदद के भाव से करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
संतान प्राप्ति की कामना के लिए
संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले लोग भौम प्रदोष के दिन हनुमान मंदिर में मसूर की दाल का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे संतान संबंधी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद मिल सकता है।
भौम प्रदोष पर ध्यान रखें
भौम प्रदोष के दिन शिव और हनुमान जी की पूजा के साथ दान, सेवा, संयम और सकारात्मक आचरण को विशेष महत्व दिया जाता है। किसी भी धार्मिक उपाय को श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना चाहिए। ये उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार या आर्थिक समाधान नहीं माना जाना चाहिए।




