घुटने तक पानी, जाम नालियां और अधूरे निर्माण… बारिश ने खोल दी गरियाबंद की व्यवस्थाओं की पोल

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गरियाबंद : बारिश शुरू होते ही गरियाबंद शहर में जलभराव की पुरानी समस्या एक बार फिर सामने आने लगी है। सड़कें चौड़ी हुईं, नए निर्माण हुए और शहर के विकास के दावे भी लगातार किए गए, लेकिन गंदे पानी की निकासी की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। अधूरी नालियां, बाधित जलनिकासी और निर्माण कार्यों की धीमी रफ्तार ने बारिश में शहर की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।

सबसे ज्यादा चिंता नेशनल हाईवे स्थित नीम रपटा क्षेत्र को लेकर है, जहां बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यह इलाका बारिश में जलभराव की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

जुलाई की मूसलाधार बारिश में घुटने से ऊपर भर गया था पानी

27, 28 और 29 जुलाई को हुई तेज बारिश के दौरान नीम रपटा क्षेत्र में घुटने से ऊपर तक पानी भर गया था। जलस्तर बढ़ने के कारण कुछ समय के लिए इस मार्ग से लोगों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी गंभीर स्थिति सामने आने के बावजूद करीब दो महीने बाद भी जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जुलाई की बारिश के बाद पालिका और संबंधित विभाग ने इस संवेदनशील स्थान को लेकर क्या ठोस कदम उठाए?

सड़क चौड़ी हुई, लेकिन पानी निकासी का रास्ता नहीं बना

गरियाबंद के जिला मुख्यालय बनने के बाद शहर में कई बदलाव हुए। सड़कें चौड़ी हुईं, नए निर्माण हुए और विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आती रही है। लेकिन दूसरी ओर बारिश का पानी निकालने जैसी बुनियादी व्यवस्था आज भी कई जगह कमजोर नजर आती है।

नीम रपटा क्षेत्र की मौजूदा स्थिति लोगों को दशकों पुरानी तस्वीर की याद दिलाती है, जब बारिश के दिनों में यहां पानी की तेज धार बहती थी और लोगों को उसे पार कर आवाजाही करनी पड़ती थी।

लोगों का कहना है कि शहर बदल गया, सड़कें बदल गईं, लेकिन जलभराव की समस्या नहीं बदली।

अधूरी नालियों और निर्माण कार्यों ने बढ़ाई परेशानी

शहर में जलभराव की एक बड़ी वजह अधूरे सड़क और नाली निर्माण को भी माना जा रहा है। नेशनल हाईवे पर सड़क चौड़ीकरण के साथ नाली निर्माण का काम शुरू हुआ, लेकिन कई जगह काम समय पर पूरा नहीं हो सका।

बारिश के दौरान पानी के सुचारू निकासी मार्ग के अभाव में सड़क पर ही पानी जमा होने लगा। वहीं सड़क किनारे बनी दुकानों के कारण कुछ स्थानों पर नालियां ढंक गई हैं। नालियों तक सफाईकर्मियों की पहुंच नहीं होने और कचरा जमा होने से भी जलनिकासी प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।

इसका असर जिला अस्पताल जाने वाले मार्ग पर भी दिखाई दिया, जहां डामर की सड़क पर बारिश का मटमैला पानी जमा रहा।

पालिका के पास क्या है जलनिकासी का मास्टर प्लान?

स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल नगर के समग्र जलनिकासी प्लान को लेकर है। लोगों का कहना है कि जिला मुख्यालय बनने के बाद शहर का विस्तार तेजी से हुआ, लेकिन जलनिकासी के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।

यदि जलनिकासी को लेकर योजना तैयार की गई है तो उसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा? और यदि योजना नहीं है तो हर साल बारिश के दौरान सामने आने वाली समस्या का स्थायी समाधान कैसे होगा?

बारिश के बाद सामने आई तस्वीरें केवल जलभराव की समस्या नहीं दिखातीं, बल्कि नालियों की सफाई, निर्माण कार्यों की निगरानी, बारिश पूर्व तैयारी और शहर की समग्र प्लानिंग पर भी सवाल खड़े करती हैं।

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पालिका और एनएच विभाग के बीच समन्वय पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण का काम कर रहे संबंधित विभाग और नगर पालिका के बीच पर्याप्त समन्वय नहीं होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।

निर्माण कार्य के दौरान बारिश के पानी की निकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से समस्या और बढ़ गई। लोगों का सवाल है कि जब जुलाई में जलभराव की गंभीर स्थिति सामने आ चुकी थी, तो उसके बाद भी नीम रपटा क्षेत्र में स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की आवाजाही के बावजूद समस्या बरकरार

नीम रपटा शहर के प्रमुख मार्ग पर स्थित है। इस रास्ते से अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं की लगातार आवाजाही होती है। इसके बावजूद लंबे समय से बनी जलभराव की समस्या का समाधान नहीं होना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

लोगों का कहना है कि कुछ घंटों के लिए बारिश का पानी जमा होना अलग बात है, लेकिन हर बारिश में एक ही स्थान पर बार-बार जलभराव होना समस्या के मूल कारणों को दूर नहीं किए जाने का संकेत है।

करोड़ों के विकास कार्यों के बावजूद शहर की तस्वीर पर सवाल

नगरवासियों के बीच पालिका के कामकाज और विकास कार्यों की गति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। नगर पालिका में भाजपा का अध्यक्ष तीसरी बार चुने जाने के बाद लोगों को शहर की बुनियादी समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों में तेजी की उम्मीद थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में करोड़ों रुपये के विकास कार्य होने के बावजूद यदि जलनिकासी जैसी बुनियादी समस्या बनी हुई है, तो विकास कार्यों की प्राथमिकता और निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब लोगों की नजर इस बात पर है कि पालिका प्रशासन जलभराव वाले स्थानों को चिन्हित कर स्थायी जलनिकासी व्यवस्था कब तक तैयार करता है, अधूरी नालियों को कब पूरा किया जाता है और नालियों से अतिक्रमण व कचरा हटाने को लेकर क्या कार्रवाई होती है।

क्योंकि हर बारिश में पानी भरने के बाद कुछ दिनों तक चर्चा और फिर समस्या के खत्म हो जाने का इंतजार करने के बजाय अब गरियाबंद को स्थायी जलनिकासी समाधान की जरूरत है।

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