गणेशोत्सव का पर्व भक्तों के लिए भगवान गणेश की भक्ति और आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी के साथ 14 सितंबर से गणेशोत्सव की शुरुआत हुई। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों ने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
गणेशोत्सव के समापन पर बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इस वर्ष दस दिवसीय गणेशोत्सव के अनुसार 25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन किया जाएगा। हालांकि, धार्मिक परंपराओं के अनुसार कई भक्त तीसरे, पांचवें या सातवें दिन भी अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार गणपति विसर्जन करते हैं।
मान्यता है कि गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जित करते समय विशेष मंत्रों का जाप करने से पूजा का विधिवत समापन होता है और भक्त बप्पा से सुख-समृद्धि, मनोकामना पूर्ति तथा अगले वर्ष पुनः घर आने की प्रार्थना करते हैं।
बप्पा की प्रतिमा विसर्जित करते समय करें इस मंत्र का जाप
गणेश विसर्जन के समय भगवान गणेश को विदाई देते हुए इस मंत्र का जाप किया जाता है—
ॐ यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्।
इष्टकामसमृद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र के माध्यम से भक्त भगवान गणेश और देवगणों से अपनी पूजा स्वीकार करने तथा अपने धाम वापस जाने की प्रार्थना करते हैं। साथ ही उनसे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और अगले वर्ष फिर से घर पधारने का आग्रह किया जाता है।
मान्यता है कि गणपति विसर्जन के समय इस मंत्र का जाप करने से दस दिवसीय गणेश पूजा का विधिवत समापन किया जाता है।
गणपति विसर्जन के समय पढ़ें यह मंत्र भी
बप्पा को विदा करते समय एक अन्य मंत्र का जाप भी किया जाता है—
गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर।
मम पूजा गृहीत्वैव पुनरागमनाय च॥
इस मंत्र के जरिए भक्त भगवान गणेश से अपने स्थान पर वापस जाने और उनकी ओर से की गई पूजा को स्वीकार करने की प्रार्थना करते हैं। साथ ही अगले वर्ष दोबारा अपने घर आने की कामना की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं में गणेशोत्सव के अंतिम दिन विसर्जन के दौरान इस मंत्र का जाप शुभ माना जाता है।
गणेश जी के इन मंत्रों का भी कर सकते हैं जाप
गणेश विसर्जन के दौरान ऊपर बताए गए मंत्रों के अलावा भगवान गणेश के कुछ अन्य प्रसिद्ध मंत्रों का भी जाप किया जा सकता है।
ये भी पढ़े :चाणक्य नीति: इन 4 तरह के लोगों पर न करें भरोसा, जानें क्या कहती है चाणक्य की सीख
1. गणपति बीज मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः।
यह भगवान गणेश का प्रमुख मंत्र माना जाता है। भक्त पूजा और जप के दौरान इसका उच्चारण करते हैं।
2. वक्रतुंड महाकाय मंत्र
वक्रतुंड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
इस मंत्र के जरिए भगवान गणेश से जीवन और कार्यों में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
3. गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥
गणेश गायत्री मंत्र का जाप भी भगवान गणेश की आराधना में किया जाता है। विसर्जन के समय भक्त श्रद्धा और आस्था के साथ इसका जाप कर बप्पा से आशीर्वाद की कामना कर सकते हैं।
श्रद्धा के साथ करें बप्पा को विदा
गणेश विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में विसर्जित करने की परंपरा नहीं, बल्कि गणेशोत्सव के दौरान की गई पूजा-अर्चना के समापन का अवसर भी माना जाता है। इसलिए विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा करें, आरती करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्रों का जाप करते हुए बप्पा से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें।




