दिवाली 2026: घर के मुख्य द्वार पर लगाएं इस तरह का बंधनवार, आम-अशोक के पत्तों से लेकर कौड़ी वाला तोरण माना जाता है शुभ

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दीपावली और दूसरे शुभ अवसरों पर घर के मुख्य द्वार को सजाने के लिए बंधनवार या तोरण लगाने की परंपरा है। वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को खास महत्व दिया गया है, क्योंकि इसे घर में ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। आम और अशोक के पत्तों से लेकर कौड़ी वाले बंधनवार तक, अलग-अलग तरह के तोरण शुभता और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। आइए जानते हैं मुख्य द्वार के लिए कैसा बंधनवार चुनना चाहिए।

आम के पत्तों का तोरण

सनातन धर्म में आम के पत्तों को शुभ माना जाता है। पूजा-पाठ, विवाह और त्योहारों के दौरान आम के पत्तों का बंधनवार लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि मुख्य द्वार पर ताजे आम के पत्तों का तोरण लगाने से घर का वातावरण मंगलमय बना रहता है। दीपावली पर भी इसे दरवाजे की सजावट के लिए चुन सकते हैं।

अशोक के पत्तों का बंधनवार

मुख्य द्वार को सजाने के लिए अशोक के पत्तों का इस्तेमाल भी किया जाता है। इन्हें शुभता और खुशहाली से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में त्योहारों या किसी मांगलिक अवसर पर अशोक के पत्तों से बना बंधनवार लगाया जा सकता है। इसे लगाते समय ध्यान रखें कि पत्ते ताजे हों और तोरण दरवाजे पर अच्छी तरह बंधा हो।

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कौड़ी और सीप वाला तोरण

अगर आप ऐसा बंधनवार चाहते हैं जिसे बार-बार इस्तेमाल किया जा सके, तो कौड़ी, सीप या मोतियों से बना तोरण एक विकल्प हो सकता है। कौड़ी को मां लक्ष्मी और धन-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस तरह के सजावटी बंधनवार त्योहारों पर घर के मुख्य द्वार को आकर्षक रूप देने के साथ पारंपरिक सजावट का हिस्सा भी बन सकते हैं।

टूटा या गंदा न रखें तोरण

वास्तु संबंधी मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर साफ और अच्छी स्थिति वाला बंधनवार लगाना चाहिए। अगर तोरण टूट गया हो, उस पर धूल जम गई हो या वह खराब दिखने लगा हो, तो उसे साफ करें या बदल दें। प्राकृतिक पत्तों से बना बंधनवार कुछ समय बाद सूखने या मुरझाने लगता है। ऐसे में उसे समय पर बदल देना चाहिए। ताजे पत्तों का इस्तेमाल करने से सजावट भी अच्छी दिखती है।

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