सर्व पितृ अमावस्या 2026: पितृ पक्ष का समापन आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को होता है। इसे पितृ अमावस्या और सर्व पितृ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन पितरों के प्रति श्रद्धा और तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।
साल 2026 में सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन श्राद्ध और तर्पण के साथ कुछ विशेष धार्मिक उपाय भी किए जाते हैं। आइए जानते हैं वे कौन से काम हैं, जिन्हें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या के दिन करना शुभ माना जाता है।
1. पितरों के मंत्रों का करें जाप
सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों का स्मरण करते हुए मंत्र जाप करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है। संभव हो तो इस दिन पितृ चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।
मंत्र:
ॐ पितृभ्यः नमः।
ॐ श्री सर्व पितृ दोष निवारणाय क्लेशं हं हं सुख शान्तिं देहि फट् स्वाहा।
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।
2. पितरों के निमित्त करें तर्पण
सर्व पितृ अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार तर्पण करते समय दक्षिण दिशा की ओर मुख किया जाता है।
तर्पण के जल में काले तिल, कच्चा दूध, कुश और अक्षत मिलाने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार पितृ तर्पण अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच से किया जाता है, जिसे पितृ तीर्थ कहा जाता है।
3. पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं दीपक
धार्मिक मान्यताओं में पीपल के वृक्ष को पितरों से जोड़ा गया है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन पीपल की जड़ में जल अर्पित करने और उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है।
मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का स्मरण और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना की जाती है।
4. जरूरतमंदों को करें अन्न का दान
सर्व पितृ अमावस्या पर पितरों का स्मरण करते हुए जरूरतमंद लोगों को अन्न दान करना पुण्यदायी माना जाता है। इसके अलावा धार्मिक परंपरा में गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों को भी भोजन कराने का महत्व बताया गया है।
मान्यता के अनुसार इस तरह के दान-पुण्य से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को सकारात्मक फल मिल सकते हैं।
5. घर की दक्षिण दिशा में जलाएं चौमुखी दीपक
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है। इसलिए सर्व पितृ अमावस्या के दिन घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है।
दीपक जलाते समय पितरों का स्मरण करते हुए अपनी भूल-चूक के लिए क्षमा मांगने की धार्मिक मान्यता है। कहा जाता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सकारात्मकता बनी रहती है।
एक उपाय भी कर सकते हैं
अगर किसी कारणवश आप सर्व पितृ अमावस्या के दिन सभी उपाय नहीं कर पाते हैं, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इनमें से अपनी श्रद्धा के अनुसार कोई एक उपाय भी किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण, तर्पण और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करना माना जाता है।



