दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पुलिसकर्मी के बेटे चेतन साहू की हत्या के मामले में अदालत ने करीब 10 महीने बाद फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने रोशनी लकड़ा, आकाश देशलहरा और कुलेश्वर साहू को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले की जांच के दौरान सामने आया था कि चेतन को मिलने के लिए बुलाया गया था, जहां विवाद के बाद उस पर हमला किया गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई थी।
दोस्ती के बाद बढ़ी दूरियां, दूसरे युवक से नजदीकी
पुलिस जांच के अनुसार, चेतन साहू दुर्ग की न्यू पुलिस लाइन का निवासी था। चेतन और रोशनी लकड़ा की मां पुलिस विभाग में आरक्षक थीं। पुलिस लाइन में रहने के दौरान दोनों के बीच दोस्ती हुई थी। बाद में रोशनी की मां का तबादला सरगुजा हो गया, जिसके बाद रोशनी भी उनके साथ वहां चली गई।
इसी दौरान रोशनी की नजदीकियां दूसरे युवक से बढ़ने लगीं। जांच में सामने आया कि चेतन उससे लगातार संपर्क करने और मिलने की कोशिश कर रहा था। फोन आने से परेशान रोशनी ने इसकी जानकारी अपने नए प्रेमी को दी थी।
ये भी पढ़े :“सड़क बनाना और सुधारना सरकार का काम, कोर्ट का नहीं”… छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
मिलने के लिए बुलाया, फिर हुआ जानलेवा हमला
घटना दिसंबर 2024 की है। रोशनी अपनी मां के साथ दुर्ग आई थी। इसकी जानकारी मिलने के बाद चेतन उससे मिलने की कोशिश करने लगा। इसके बाद उसे कसारीडीह सिविल लाइन स्थित क्वार्टर के पास मिलने के लिए बुलाया गया।
29 दिसंबर 2024 की रात करीब 8:30 बजे आयुष्मान हॉस्पिटल के पास चेतन के साथ मारपीट की गई। आरोपियों ने उस पर लाठी-डंडों और घातक हथियारों से हमला किया। गंभीर चोटें लगने के कारण चेतन की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
तीन आरोपियों को दोषी ठहराया, नाबालिगों पर भी हुई कार्रवाई
पुलिस ने जांच के दौरान रोशनी लकड़ा, आकाश देशलहरा और कुलेश्वर साहू को गिरफ्तार किया था। मामले में तीन नाबालिगों को भी पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी। उनके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रक्रिया अलग से चली या चल रही है, इसकी पुष्टि आधिकारिक अभिलेखों से की जानी चाहिए।
प्रथम अपर सत्र न्यायालय, दुर्ग ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास समेत अलग-अलग अवधि की सजा और अर्थदंड सुनाया है।
किन धाराओं में मिली सजा?
उपलब्ध सजा वारंट के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1)/190 और 61(2) के तहत आजीवन कारावास तथा 500-500 रुपये अर्थदंड लगाया गया है। वहीं, धारा 191(2) के तहत दो साल और धारा 191(3) तथा 118(1) के तहत तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। संबंधित धाराओं में अर्थदंड भी लगाया गया है। आदेश के मुताबिक, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
करीब 10 महीने तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले में अदालत ने तीनों आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी माना है।




