छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी, लेकिन 21 क्विंटल बोनस पर सरकार का बड़ा अपडेट

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रायपुर :  छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होगी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल धान खरीदी पुरानी नीति के तहत ही की जाएगी। प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा तक धान नहीं बेच पाने वाले किसानों को भी अंतर की राशि या बोनस देने के संबंध में सरकार ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

एकात्म परिसर में आयोजित प्रेसवार्ता में कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार अपने वादे के मुताबिक ₹3100 प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान खरीदेगी। उन्होंने यह भी बताया कि धान खरीदी की व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए नए केंद्र, ऑनलाइन टोकन और डिजिटल निगरानी सहित कई व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

21 क्विंटल बोनस पर अभी अंतिम फैसला नहीं

धान खरीदी से पहले चर्चा थी कि यदि कोई किसान प्रति एकड़ निर्धारित 21 क्विंटल की मात्रा से कम धान बेचता है, तो उसे शेष मात्रा के अंतर की राशि दी जा सकती है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में सरकार ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल खरीदी मौजूदा नीति के अनुसार ही होगी। कम उत्पादन या निर्धारित सीमा से कम धान बेचने की स्थिति में 21 क्विंटल तक का बोनस देने का प्रस्ताव अभी प्रक्रियाधीन है।

3100 उपार्जन केंद्रों पर होगी खरीदी

किसानों को धान बेचने में सुविधा देने के लिए इस साल 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। इनके जुड़ने के बाद प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से खरीदी की जाएगी।

सरकार ने सभी केंद्रों पर किसानों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने और नए तथा पुराने जूट बारदानों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वास्तविक किसानों से खरीदी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था भी लागू रहेगी।

भारत सरकार के खाद्य विभाग ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ से केंद्रीय पूल में 73 लाख मीट्रिक टन चावल का लक्ष्य निर्धारित किया है।

अवैध धान की आवक रोकने के लिए 273 चेक पोस्ट

धान खरीदी के दौरान दूसरे राज्यों से अवैध धान की आवक, पुनर्चक्रण और अनियमितताओं पर नियंत्रण के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा रही है। इसके लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का विस्तार किया जाएगा।

सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी के लिए 273 चेक पोस्ट और 131 सीमावर्ती उपार्जन केंद्र चिह्नित किए गए हैं। जिला स्तर पर विशेष जांच दल भी गठित किए जाएंगे।

कंट्रोल सेंटर में प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिए अलग-अलग समय-सीमा निर्धारित की गई है। अति संवेदनशील केंद्रों की शिकायतों का समाधान 24 घंटे, संवेदनशील केंद्रों की शिकायतों का 48 घंटे और सामान्य केंद्रों की शिकायतों का 72 घंटे के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

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QR कोड और लोकेशन ट्रैकिंग से होगी निगरानी

धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में चावल की प्रत्येक बोरी पर क्यूआर कोड आधारित स्कैनिंग और ट्रेसिबिलिटी सुनिश्चित करने की योजना है। इससे परिवहन की निगरानी और चावल के पुनर्चक्रण पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।

धान के परिवहन के लिए लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से लैस वाहनों के उपयोग के निर्देश भी दिए गए हैं। इससे परिवहन की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।

‘तुंहर टोकन’ एप से 24 घंटे मिलेगा ऑनलाइन टोकन

किसानों को समितियों में लंबी कतारों से राहत देने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप का उपयोग करेगा। इसके माध्यम से किसान 24 घंटे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर सकेंगे।

एप पर ओटीपी आधारित पंजीयन की सुविधा होगी। प्रत्येक समिति की प्रतिदिन की खरीदी सीमा में से 70 प्रतिशत टोकन एप के जरिए और शेष 30 प्रतिशत टोकन समिति स्तर पर जारी किए जाएंगे।

एप से जारी होने वाले टोकन में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी लघु एवं सीमांत किसानों और 20 प्रतिशत बड़े किसानों के लिए निर्धारित की गई है। रकबे के आधार पर टोकन की व्यवस्था इस प्रकार होगी:

दो एकड़ तक: एक टोकन

दो एकड़ से अधिक और 10 एकड़ तक: दो टोकन

10 एकड़ से अधिक: तीन टोकन

राशन में जनवरी से मिलेगा बिना टूटे चावल

कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार एपीएल और बीपीएल राशन कार्डधारकों को बिना टूटे चावल यानी सुपर फाइन चावल उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रही है। उनके अनुसार, जनवरी से गरीबों को यह चावल मिलना शुरू हो जाएगा।

सरकार का कहना है कि नए उपार्जन केंद्रों, ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन, डिजिटल क्रॉप सर्वे, क्यूआर कोड आधारित ट्रेसिबिलिटी और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से धान खरीदी को अधिक पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाया जाएगा। हालांकि, 21 क्विंटल तक बोनस या अंतर की राशि देने के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।

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