सीमित संसाधनों के बीच तराशा हीरा: छत्तीसगढ़ हॉकी लीग में बारगांव के किसान का बेटा ढालेश्वर यादव बना बैलाडीला बुल्स की ‘दीवार’

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बेमेतरा टेकेश्वर दुबे : छत्तीसगढ़ की पहली और सबसे बड़ी हॉकी लीग (CHL) में ग्रामीण अंचल के एक होनहार खिलाड़ी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है एक छोटे से गांव बारगांव के एक साधारण किसान परिवार के बेटे ढालेश्वर यादव ने बैलाडीला बुल्स टीम की ओर से खेलते हुए मैदान पर शानदार गोलकीपिंग करते अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर वे पूरी लीग में अपनी टीम के लिए अभेद्य ‘दीवार’ बनकर उभरे हैं और अपनी खेल कला से सभी खेल प्रेमियों को प्रभावित किया है।

कड़े संघर्ष और सीमित संसाधनों से शिखर तक का सफर

ढालेश्वर यादव का यह मुकाम कड़ी मेहनत और अटूट लगन का परिणाम है, वे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बारगांव से लगे खेल मैदान में रोजाना सुबह और शाम हॉकी का कड़ा अभ्यास करते थे ग्रामीण स्तर पर संसाधनों की भारी कमी होने के बावजूद,ढालेश्वर के खेल के प्रति समर्पण और उनके कोच तुलसी साहू के कुशल नेतृत्व ने इस बाधा को आड़े नहीं आने दिया कोच की सही रणनीति, कड़े अनुशासन और खिलाड़ी के जुनून ने मिलकर इस ग्रामीण प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर के मंच तक पहुँचाया

कोच तुलसी साहू का मार्गदर्शक विजन

ढालेश्वर की इस ऐतिहासिक सफलता में उनके कोच तुलसी साहू का सबसे अहम योगदान रहा है,सीमित संसाधनों के बीच ग्रासरूट स्तर (जमीनी स्तर) के मैदान से एक खिलाड़ी को तराश कर राष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना कोच की कड़ी मेहनत और दूरदर्शिता को बयां करता है उनकी उच्च स्तरीय ट्रेनिंग और रणनीतियों ने ढालेश्वर की खेल प्रतिभा को निखारने में मुख्य भूमिका निभाई

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हॉकी अकादमी में ले रहे है प्रशिक्षण

वर्तमान में ढालेश्वर अपनी खेल बारीकियों को और मजबूत करने के लिए रायपुर स्थित आवासीय हॉकी खेल अकादमी में रहकर विशेष प्रशिक्षण ले रहे हैं।

राज्य स्तर पर लहरा चुके हैं परचम

यह पहली बार नहीं है जब ढालेश्वर ने अपनी खेल प्रतिभा से सबको चौंकाया है इससे पहले राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी उनका प्रदर्शन स्वर्णिम रहा है उन्होंने राजनांदगांव में आयोजित 24वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा हॉकी प्रतियोगिता (2024) में उत्कृष्ट खेल की बदौलत प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक जीता था वहीं, इसके पिछले वर्ष 23वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा हॉकी प्रतियोगिता (2023) में उन्होंने द्वितीय स्थान हासिल कर रजत पदक अपने नाम किया था।

किसान पिता का सपना बेटे ने किया साकार

बारगांव के रहने वाले देवचरण यादव एक साधारण कृषक हैं और उनकी माता एक गृहणी हैं अपने बेटे को हॉकी की इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की लीग में खेलते देखना इस किसान दंपत्ति का एक बड़ा सपना था आज बेटे ढालेश्वर ने अपनी ईमानदारी, कड़ी मेहनत और खेल के प्रति अपनी निष्ठा से माता-पिता के इस सुनहरे सपने को हकीकत में बदल दिया है उनकी इस सफलता पर पूरे क्षेत्र और खेल प्रेमियों में हर्ष का माहौल है

प्रतिभा किसी सुख – सुविधा की मोहताज नहीं होती

इस अवसर पर व्यायाम शिक्षिका व कोच तुलसी साहू ने कहा कि ढालेश्वर की यह सफलता उसकी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और खेल के प्रति बेपनाह जुनून का परिणाम है,ग्रामीण स्तर पर संसाधनों की कमी के बावजूद उसने कभी अपनी हिम्मत कम नहीं होने दी, सुबह और शाम मैदान पर पसीना बहाकर उनसे साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुख – सुविधा की मोहताज नहीं होती एक कोच के रूप में उसे जमीनी स्तर से तराश कर इस मुकाम तक पहुँचते देखना मेरे लिए अत्यंत गौरवशाली है,मुझे पूरा विश्वास है कि वह आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करेगा

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