परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद/छुरा : गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्रों में जंगली जानवरों की बढ़ती आवाजाही अब ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। जंगलों तक सीमित रहने वाले जंगली जानवर अब गांवों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचकर मवेशियों को निशाना बना रहे हैं। ताजा मामला ग्राम रूवाड़ का है, जहां बीती शाम करीब 9 बजे एक तेंदुआ गांव में घुसकर उमेंद सिंह दीवान के घर के भीतर बंधे बछड़े पर हमला कर दिया।प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, तेंदुए ने घर में घुसकर बछड़े को अपना शिकार बनाने की कोशिश की। इसी दौरान आसपास मौजूद ग्रामीणों को घटना की भनक लगी तो उन्होंने शोर मचाते हुए तेंदुए को खदेड़ना शुरू किया। ग्रामीणों के एकजुट होकर दौड़ाने पर तेंदुआ बछड़े को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। हालांकि इस हमले में बछड़ा गंभीर रूप से घायल हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक तेंदुए ने बछड़े की गर्दन की नली को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे उसकी जान बचने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है।
पहले भी हो चुके हैं भालू और तेंदुए के हमले
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्रों में भालू और तेंदुए की गतिविधियां लगातार सामने आ रही हैं। विभिन्न इलाकों में जंगली जानवरों द्वारा मवेशियों के साथ-साथ इंसानों पर भी हमले किए जाने की घटनाएं हो चुकी हैं। हाल ही में भालू के हमले में एक ग्रामीण की उपचार के दौरान मौत की घटना ने भी वनांचल क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। अब तेंदुए का सीधे ग्रामीण के घर में घुसकर मवेशी पर हमला करना वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही और ग्रामीण सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रामीणों ने की वन विभाग से नियमित गश्त की मांग
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम और रात के समय जंगली जानवरों की आवाजाही की आशंका अधिक रहती है। ऐसे में वन विभाग की टीम को संवेदनशील गांवों में लगातार निगरानी रखनी चाहिए, ताकि समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके और किसी बड़ी अनहोनी को रोका जा सके।
अब वन विभाग के सामने ग्रामीणों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जंगली जानवर अब ग्रामीणों के घरों तक पहुंच रहे हैं, तब उनकी सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे? क्या प्रभावित गांवों में नियमित गश्त, कैमरा निगरानी और त्वरित रेस्क्यू टीम की व्यवस्था की जाएगी? वन्यजीवों और मानव आबादी के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकना अब वन विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।ग्रामीणों को उम्मीद है कि वन विभाग इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण करेगा, घायल बछड़े के उपचार और नियमानुसार मुआवजे की व्यवस्था करेगा तथा क्षेत्र में तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाएगा। ताकि जंगल और गांव के बीच बढ़ता यह संघर्ष किसी इंसानी जान के लिए खतरा न बन जाए।




