गिलोय है आयुर्वेद का ‘अमृत’! जानिए किन 5 बीमारियों में मिलता है सबसे ज्यादा फायदा

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गिलोय (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) एक बेल वाला पौधा होता है जो आमतौर पर जंगलों और झाड़ियों में पाया जाता है। गिलोय का इस्तेमाल लंबे समय से आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता रहा है। कोरोना में गिलोय के फायदे जानने के बाद आम लोगों ने भी इसे अपने घरों में लगाना शुरू कर दिया। गिलोय आसानी से उगने और लंबा होने वाला पौधा है। आप घर में भी इसकी बेल लगा सकते हैं। आइये जानते हैं गिलोय का इस्तेमाल किन बीमारियों को ठीक करने में किया जाता है।

गिलोय के पत्तों की पहचान कैसे करें?
गिलोय के पत्ते पान और मनी प्लांट के पत्तों से बड़े होते हैं। गिलोय की पहचान करना आसान है। इसकी पत्तियां पान के पत्तों जैसी होती हैं और इनका रंग गहरा हरा होता है। आप गिलोय को अपने घरों में सजावट के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं। गिलोय को आयुर्वेद में गुडूची और अमृता जैसे नामों से भी जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, गिलोय की बेल जिस पेड़ पर चढ़ती है, उसके गुण भी उसमें आ जाते हैं। इसलिए नीम के पेड़ पर चढ़ने वाली गिलोय की बेल को दवा के लिहाज से सबसे अच्छा माना जाता है। इसे नीम गिलोय के नाम से जाना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार जाने गिलोय के औषधीय गुण
आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेदा विशेषज्ञ) आयुर्वेद में गिलोय की पत्तियों, जड़ और तना सभी को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। लेकिन बीमारियों के इलाज में सबसे ज़्यादा इसके तने का इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। गिलोय में सूजन कम करने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी पाए जाते हैं और ये कैंसर-रोधी गुणों से भरपूर हैं। गिलोय का इस्तेमाल बुखार, पीलिया, गठिया, डायबिटीज, कब्ज, एसिडिटी, अपच और यूरिन से जुड़ी समस्याओं में राहत देने के लिए किया जाता है। बहुत कम औषधीय पौधे ऐसे हैं जो शरीर के तीनों दोषों वात, पित्त और कफ को संतुलित कर सकते हैं। गिलोय उनमें से एक है। गिलोय में टॉक्सिन्स को बाहर निकालने वाले गुण पाए जाते हैं जो इन हानिकारक टॉक्सिन्स से होने वाली बीमारियों को ठीक करने में असरदार भूमिका निभाते हैं।

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गिलोय का सेवन करने का सही तरीका
आमतौर पर गिलोय का सेवन तीन तरीकों से किया जा सकता है।

गिलोय सत्व
गिलोय का रस
गिलोय चूर्ण
गिलोय के फायदे
अपच– गिलोय का काढ़ा पेट की कई बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है। इसलिए कब्ज और अपच से राहत पाने के लिए रोज गिलोय का सेवन करें। इसके लिए रात में सोने से पहले आधे से एक चम्मच गिलोय पाउडर को गुनगुने पानी के साथ लें।

डायबिटीज- जानकारों के अनुसार, गिलोय हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट के तौर पर काम करता है और टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने में असरदार भूमिका निभाता है। गिलोय का जूस बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल को कम करता है, इंसुलिन के बनने को बढ़ाता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करता है। इसके लिए आप एक कप पानी में दो से तीन चम्मच गिलोय का जूस मिलाकर सुबह खाली पेट पी लें। आप आधा चम्मच गिलोय पाउडर पानी के साथ दिन में दो बार ले सकते हैं। लेकिन इसे खाना खाने के एक से डेढ़ घंटे बाद लेना चाहिए।

डेंगू- गिलोय के बुखार कम करने वाले गुण तेज़ी से बुखार घटाने में मदद करते हैं। यह इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करता है, जिससे बीमारी से तेज़ी से ठीक होने में मदद मिलती है। इसके लिए 1 कप पानी में दो से तीन चम्मच गिलोय का रस मिलाएं और इसे दिन में दो बार पिएं। आपको इसे खाने से करीब एक से डेढ़ घंटे पहले लेना चाहिए।

एनीमिया- शरीर में खून की कमी से कई तरह की बीमारियों का कारण बनती हैं। खासतौर से महिलाओं में एनीमिया की बड़ी समस्या होती है। महिलाओं को इसके लिए गिलोय का जूस बहुत फायदेमंद साबित होता है। गिलोय का जूस पीने से खून की कमी दूर होती है और इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है। इसके लिए दो से तीन चम्मच गिलोय का जूस शहद या पानी के साथ मिलाकर, दिन में दो बार खाने से पहले लें।

लिवर के लिए फायदेमंद– गिलोय सत्व का सेवन लिवर के लिए टॉनिक का काम करता है। यह खून को साफ करता है और एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम के लेवल को बढ़ाता है। इससे लिवर पर काम का बोझ कम होता है और वह स्वस्थ रहता है। गिलोय का नियमित सेवन लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचाने में मदद करता है। एक से दो चुटकी गिलोय सत्व को शहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार लें।

डॉक्टर चंचल शर्मा ने सलाह दी कि प्रेग्नेंट और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को गिलोय न लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि प्रेग्नेंसी के दौरान गिलोय से होने वाले नुकसान का कोई सबूत नहीं है, फिर भी डॉक्टर से सलाह लिए बिना इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

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