वर्षों से लंबित है हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की मांग, अधिकारियों की समझाइश के बाद भी आंदोलन जारी; लिखित आश्वासन पर अड़े ग्रामीण
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/ छुरा : गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम रुवाड़ में हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की वर्षों पुरानी मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार सड़क पर आ गया। लंबे समय से शासन-प्रशासन से स्कूल भवन निर्माण की मांग किए जाने के बावजूद ठोस पहल नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी कर भवन के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक स्कूल भवन निर्माण को लेकर ठोस कार्रवाई और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों के अनुसार रुवाड़ में हायर सेकेंडरी स्कूल के लिए पर्याप्त एवं सुविधायुक्त भवन नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूल भवन की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर कई बार शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन वर्षों गुजर जाने के बाद भी भवन निर्माण की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हो सकी। इससे ग्रामीणों और विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ती गई।
बच्चों की परेशानी को देखते हुए उठाया आंदोलन का कदम
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की समस्या का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें जर्जर और अपर्याप्त भवन में पढ़ाई करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसी समस्या को लेकर ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी कर भवन के सामने धरना शुरू किया।
आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग एवं प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को समझाने के लिए छुरा बीईओ किशुन लाल मतावले,तहसीलदार मयंक अग्रवाल,और छुरा अनुविभागीय अधिकारी विशाल कुमार महाराणा भी पहुंचे और स्कूल में तालाबंदी समाप्त कर आंदोलन खत्म करने की समझाइश दी। हालांकि ग्रामीण अपनी वर्षों पुरानी मांग को लेकर अड़े रहे और स्पष्ट कहा कि केवल मौखिक आश्वासन से अब आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
विधानसभा क्षेत्र को लेकर कथित टिप्पणी से ग्रामीणों में नाराजगी
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात का भी हवाला दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे स्कूल भवन की मांग को लेकर जिला मुख्यालय गरियाबंद पहुंचे और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा, तब उनसे पूछा गया कि वे किस विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। ग्रामीणों के अनुसार जब उन्होंने बताया कि वे बिन्द्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र से हैं, तब कथित तौर पर उनसे कहा गया कि यदि वे राजिम विधानसभा क्षेत्र से होते तो काम जल्दी हो जाता, क्योंकि उनके विधानसभा क्षेत्र में विपक्ष का विधायक है और ऐसे में यह काम अभी नहीं हो पाएगा।
ग्रामीणों ने इस कथित टिप्पणी को राजनीति से प्रेरित बताते हुए नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी विषयों को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों की शिक्षा किसी विधानसभा क्षेत्र, दल या राजनीतिक प्रतिनिधित्व के आधार पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
लिखित आश्वासन की मांग, बोले- अब केवल आश्वासन से नहीं मानेंगे
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि हायर सेकेंडरी स्कूल भवन का निर्माण कब तक शुरू होगा और कब तक पूरा किया जाएगा, इसकी स्पष्ट समय-सीमा प्रशासन की ओर से लिखित रूप में दी जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से मांग करते आ रहे हैं, लेकिन हर बार आश्वासन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसलिए इस बार वे ठोस कार्रवाई के बिना आंदोलन समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं।
एसडीएम ने खुलवाया स्कूल का ताला, ग्रामीणों ने बच्चों को घर भेजा
धरना स्थल पर पहुंचे अनुविभागीय अधिकारी ने ग्रामीणों से बातचीत के बाद स्कूल का ताला खुलवाया। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्ति में इस प्रकार तालाबंदी करना उचित नहीं है। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजने का निर्णय लेते हुए कहा कि जब तक स्कूल भवन निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनके बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई बाधित करना नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के लिए बेहतर और सुरक्षित स्कूल भवन की मांग को शासन-प्रशासन तक गंभीरता से पहुंचाना है। उनका कहना है कि यदि वर्षों से लंबित मांग पर अब भी ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जा सकता है।
अब सवाल यह है कि वर्षों से लंबित रुवाड़ हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की मांग पर प्रशासन कब तक ठोस निर्णय लेता है? क्या ग्रामीणों को लिखित आश्वासन देकर समस्या का समाधान कराया जाएगा, या फिर विद्यार्थियों और ग्रामीणों को अपनी मांग के लिए आगे भी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा? फिलहाल ग्रामीणों के आंदोलन से स्कूल भवन निर्माण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

