54 एकड़ सरकारी जमीन पर घमासान! ग्रामीणों के विरोध के आगे झुका प्रशासन, 10 दिन टला चक्काजाम

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आरंग :  ग्राम पंचायत रसनी की करीब 54 एकड़ (22 हेक्टेयर) बहुउद्देश्यीय शासकीय भूमि को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को सौंपने के प्रस्ताव के विरोध में ग्रामीणों द्वारा 15 अगस्त से नेशनल हाईवे पर किए जाने वाले अनिश्चितकालीन चक्काजाम को फिलहाल 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व के सम्मान और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन को फिलहाल टालने का निर्णय लिया।

मामले को लेकर आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस और ग्रामीणों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीणों ने शासकीय भूमि के आवंटन को लेकर अपनी आपत्तियां और मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्थिति में गांव की बहुउद्देश्यीय शासकीय भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं।

बैठक के दौरान प्रशासन की ओर से मामले में सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने 15 अगस्त को प्रस्तावित चक्काजाम को 10 दिनों के लिए स्थगित करने पर सहमति जताई। हालांकि ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि तय समयसीमा के भीतर यदि शासन-प्रशासन की ओर से भूमि आवंटन के मामले में कोई ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे दोबारा नेशनल हाईवे पर उतरकर बेमियादी चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

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बैठक में एसडीएम अभिलाषा पैकरा के अलावा सीएसपी लंबोदर पटेल, आरंग तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे, थाना प्रभारी हरीश साहू, उद्योग विभाग के प्रतिनिधि, रायपुर जिला पंचायत सदस्य वतन अंगनाथ चंद्राकर, उपसरपंच पारसमणि चंद्राकर सहित सूरज शर्मा, गोपाल चंद्राकर, मोहित चंद्राकर, होरी चंद्राकर, खुबचंद चंद्राकर, समीर चंद्राकर, भरत चंद्राकर सहित ग्राम पंचायत रसनी के स्थानीय प्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।

आंदोलन स्थगित, नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर

फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। स्वतंत्रता दिवस पर प्रस्तावित चक्काजाम नहीं होने से प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। हालांकि 10 दिनों की यह मोहलत अब प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा मानी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समयसीमा के भीतर ठोस समाधान नहीं निकला तो आंदोलन पहले से अधिक व्यापक रूप में शुरू किया जाएगा।

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