सड़क हादसों पर लगाम की तैयारी! CM साय का ‘जीरो फेटेलिटी’ प्लान, 23 ब्लैक स्पॉट से लेकर हाईटेक ड्राइविंग टेस्ट तक बड़े निर्देश

Spread the love

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में सड़क सुरक्षा, दुर्घटनाओं में कमी, ग्रामीण क्षेत्रों में बस सेवा का विस्तार, वाहनों की फिटनेस जांच, एचएसआरपी, लंबित चालानों की वसूली और कम्प्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट समेत कई अहम विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ मिशन मोड में काम करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं में होने वाली संभावित मौतों को रोकना होना चाहिए। इसके लिए हादसे से पहले सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के साथ दुर्घटना के बाद घायल को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी प्रभावी करनी होगी।

23 ब्लैक स्पॉट पर चल रहा सुधार कार्य

बैठक में सड़क दुर्घटनाओं के संभावित कारणों और ब्लैक स्पॉट को लेकर समीक्षा की गई। बताया गया कि प्रदेश के 23 ब्लैक स्पॉट में सुधार की कार्रवाई फिलहाल प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने इन स्थानों पर जरूरी सुधारात्मक और सुरक्षात्मक कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की लगातार पहचान और विश्लेषण किया जाए, ताकि सड़क संरचना, यातायात व्यवस्था और अन्य जरूरी उपायों में समय रहते सुधार किया जा सके।

ये भी पढ़े :OTT Release October 2026: अक्टूबर के पहले हफ्ते OTT पर मनोरंजन का धमाका, ‘दुपहिया 2’ से ‘चुंबक 2’ तक 7 नई रिलीज

दुर्घटना के बाद शुरुआती समय सबसे अहम

मुख्यमंत्री ने दुर्घटना के बाद घायलों को तत्काल मदद पहुंचाने की व्यवस्था पर भी जोर दिया। उन्होंने दुर्घटना की सूचना मिलने, एंबुलेंस की उपलब्धता, नजदीकी अस्पताल तक पहुंच और उपचार के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही पीएम-राहत योजना और राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया। बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपए तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। वहीं राहवीर योजना दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करती है।

13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसें

ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाने पर भी मुख्यमंत्री ने जोर दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के विस्तार के निर्देश देते हुए उन क्षेत्रों को प्राथमिकता से चिन्हित करने कहा, जहां अभी नियमित बस सेवा उपलब्ध नहीं है।

बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने परिवहन सुविधा से वंचित क्षेत्रों का सर्वे कर नए मार्गों की संभावनाओं का परीक्षण करने के निर्देश दिए।

कोंटा-जगरगुंडा में 6 घंटे का सफर अब करीब 45 मिनट

दूरस्थ इलाकों में योजना के असर का उदाहरण देते हुए बैठक में बताया गया कि कोंटा से जगरगुंडा के बीच पहली बार शुरू हुई बस सेवा से स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है। पहले अंदरूनी क्षेत्रों से इस यात्रा में करीब छह घंटे तक का समय लग जाता था, जबकि बस सेवा शुरू होने के बाद यह सफर करीब 45 मिनट में पूरा हो रहा है।

इससे स्थानीय लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।

पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को पर्यटन मिशन के साथ प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सुरक्षित और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन की संभावनाओं पर काम करने को कहा।

सरकार के अनुसार, पर्यटन स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी बढ़ने से स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य सेवाओं से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

वाहनों की फिटनेस जांच होगी और प्रभावी

मुख्यमंत्री ने वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था को तकनीक आधारित और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। बैठक में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की मौजूदा व्यवस्था और नए केंद्रों की स्थापना को लेकर भी चर्चा हुई।

उन्होंने 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुके वाहनों के नियमानुसार नवीनीकरण और फिटनेस संबंधी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

HSRP और लंबित चालानों की रिकवरी में तेजी

मुख्यमंत्री ने वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) लगाने के अभियान को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही लंबित चालानों की रिकवरी में तेजी लाने और अत्याधुनिक चालान प्रणाली का अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया।

अब कम्प्यूटराइज्ड होगा ड्राइविंग टेस्ट

ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विकसित की जा रही ई-ट्रैक व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इसमें सीसीटीवी कैमरों और सेंसर आधारित तकनीक के जरिए कम्प्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिक उपयोग किया जाए, ताकि परीक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो और आवश्यक दक्षता रखने वाले आवेदकों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *