मुखिया के मुखारी – वक्त था निखरने का, ईमानदारी बिखर गई
मुखिया के मुखारी – वक्त था निखरने का, ईमानदारी बिखर गई
मोर गांव अउ तोर सहर के खबर, छत्तीसगढ़ के हर गढ़ के खबर
मुखिया के मुखारी – वक्त था निखरने का, ईमानदारी बिखर गई
मुखिया के मुखारी – सधवा ,विधवा, डीड़वा का है जलवा
मुखिया के मुखारी – जनसंपर्क बना कर { हाथ } संपर्क है
मुखिया के मुखारी – कड़ी से कड़ी जुड़ रही,हथकड़ी कका को ढूंढ रही
मुखिया के मुखारी – धीरे -धीरे नही सरकार कार्यवाही सांय -सांय करिए
मुखिया के मुखारी – हम देश के साथ हैं,पर बोलियों में उनके साथ हैं
मुखिया के मुखारी – कुउद्देश्य वाली पूजा से नही मिलती महादेव की कृपा
मुखिया के मुखारी – तब अब और आगे अर्द्ध सत्य ,अर्द्ध सत्य ही रहेगा
मुखिया के मुखारी –हमला झन देबे भगवान,अईसन घोटालेबाज नेता झन देबे
मुखिया के मुखारी –दंगो की भेट दलित हिंदू क्यों चढ़ रहा ?