छत्तीसगढ़ में डिजिटल फसल सर्वे की डेडलाइन तय, 10 नवंबर तक पूरा करना होगा काम; लापरवाही पर होगी कार्रवाई

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) को लेकर राज्य सरकार ने काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव विकासशील ने अधिकारियों को सर्वे का शेष कार्य हर हाल में 10 नवंबर तक पूरा करने को कहा है। साथ ही स्पष्ट किया है कि फसल की वास्तविक स्थिति दर्ज करने में लापरवाही या डेटा में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में बताया गया कि राज्य में अब तक डिजिटल क्रॉप सर्वे का 93.84 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बैठक में सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान खसरों की जियो-रेफरेंसिंग, पॉलीगॉन निर्माण, फसलों के भौतिक सत्यापन और सर्वे डेटा की गुणवत्ता पर चर्चा की गई।

 10 नवंबर तक पूरा होगा सर्वे, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

राजस्व सचिव शम्मी आबिदी ने बैठक में सर्वे की प्रगति की जानकारी दी। इसके बाद मुख्य सचिव विकासशील ने शेष काम को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का उद्देश्य प्रत्येक खसरे में बोई गई फसल और उसके क्षेत्रफल की वास्तविक स्थिति को रिकॉर्ड में दर्ज करना है।

इसके लिए फसल का भौतिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, पॉलीगॉन निर्माण और संबंधित जानकारी को डिजिटल प्रणाली में अपलोड करना जरूरी है। जिन खसरों के नक्शे उपलब्ध नहीं हैं या जिनकी जियो-रेफरेंसिंग नहीं हुई है, उनकी पहचान कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।

अधिकारियों को ग्रामवार उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर शेष खसरों में धान और अन्य फसलों की वास्तविक स्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर पिछले वर्ष के फसल रिकॉर्ड का संदर्भ भी लिया जा सकेगा।

 1 नवंबर से ग्राम सभाओं में किसान उठा सकेंगे समस्याएं

डिजिटल फसल सर्वे से संबंधित जानकारी के सत्यापन और सुधार के लिए 1 नवंबर से ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं में किसानों की शिकायतों और फसल रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों को सुना जाए तथा नियमानुसार उनका निराकरण किया जाए।

किसानों को ग्राम सभाओं की तारीख और उद्देश्य की जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है। इसके साथ ही ऐसे किसानों की ग्रामवार सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनकी फसल संबंधी जानकारी का सत्यापन या सुधार किया जाना है।

कलेक्टरों को ग्राम सभाओं सहित सर्वे की आगे की कार्ययोजना तैयार करने और सुधार के लिए मिले आवेदनों की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

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 सर्वे के डेटा की होगी क्रॉस वेरिफिकेशन से जांच

मुख्य सचिव ने सर्वे में दर्ज आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला और राज्य स्तर पर क्रॉस वेरिफिकेशन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की त्रुटि या डेटा संबंधी गड़बड़ी मिलने पर तत्काल सुधार किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि रिकॉर्ड अंतिम रूप से फ्रीज होने के बाद गलतियों को गंभीरता से लिया जाएगा। इसलिए सर्वे का काम केवल औपचारिकता के तौर पर पूरा न किया जाए, बल्कि खेतों में बोई गई फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर रिकॉर्ड तैयार किया जाए।

सर्वेयर, पटवारी और राजस्व विभाग के मैदानी अमले को सक्रिय करते हुए ग्रामवार प्रगति की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया है। जिन क्षेत्रों में सर्वे 90 प्रतिशत या उससे अधिक पूरा हो चुका है, वहां शेष कार्य तेजी से पूरा करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।

वन अधिकार पट्टाधारी और विशेष श्रेणी के किसानों का भी होगा पंजीयन

बैठक में विशेष श्रेणी के किसानों की जानकारी दर्ज करने पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के अंतर्गत आने वाले किसानों, वन क्षेत्रों के गांवों के किसानों, ग्राम कोटवारों और शासकीय पट्टाधारी किसानों का अलग से पंजीयन करने के निर्देश दिए।

इन किसानों का विवरण डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्रीस्टैक में अपलोड करने को कहा गया है। संबंधित सर्वे और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर 10 नवंबर तक रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेष रूप से जनजातीय जिलों और एफआरए क्षेत्रों में काम की नियमित निगरानी करने को कहा गया है, ताकि कोई भी पात्र किसान पंजीयन या फसल संबंधी विवरण दर्ज कराने से छूट न जाए।

 जल जीवन मिशन की भी समीक्षा करने के निर्देश

डिजिटल क्रॉप सर्वे की समीक्षा के साथ मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को जल जीवन मिशन के कार्यों की प्रगति पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए।

बैठक में खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, संचालक भू-अभिलेख विनीत नंदनवार, संचालक खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग फरिया आलम सिद्दीकी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सरकार का जोर डिजिटल फसल सर्वे को समय-सीमा में पूरा करने के साथ ही रिकॉर्ड की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर है। इसके लिए अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई, नियमित निगरानी और किसानों की समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए गए हैं।

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