ग्रामवासियों ने बीईओ , डीईओ और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर जताई गंभीर चिंता
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद छुरा : गरियाबंद जिले के विकासखंड छुरा के ग्राम रूवाड़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। ग्रामवासियों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) छुरा, जिला शिक्षा अधिकारी एवं कलेक्टर गरियाबंद को ज्ञापन सौंपकर वर्षों से लंबित हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूल भवन की स्वीकृति तथा पिछले तीन वर्षों से जर्जर हालत में पड़े माध्यमिक शाला भवन के पुनर्निर्माण की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो विद्यालय में तालाबंदी कर आंदोलन शुरू किया जाएगा।ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि माध्यमिक शाला भवन पिछले तीन वर्षों से अत्यंत जर्जर स्थिति में है। भवन की छत से प्लास्टर और सीमेंट लगातार गिर रहा है तथा बरसात के दौरान पानी टपकने से बच्चों और शिक्षकों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग अब तक गंभीर नहीं हुआ है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूल का संचालन कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक भवन निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। परिणामस्वरूप हाई और हायर सेकेंडरी के छात्र-छात्राओं को जर्जर माध्यमिक विद्यालय भवन और गांव के अन्य छोटे-छोटे कमरों में एवं ग्राम वासियों के सहयोग से निर्मित टिना शेड में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस दोहरी समस्या के कारण विद्यार्थियों को सुरक्षित और व्यवस्थित शैक्षणिक वातावरण नहीं मिल पा रहा है। प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेलकूद सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है। इस संबंध में ग्राम पंचायत एवं ग्रामीणों द्वारा कई बार संबंधित विभाग के अधिकारियों एवं शिक्षा मंत्री को भी आवेदन और मांग पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर केवल आश्वासन ही मिले हैं।ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि सात दिनों के भीतर जर्जर माध्यमिक शाला भवन के जीर्णोद्धार अथवा पुनर्निर्माण और हाई-हायर सेकेंडरी स्कूल के नए भवन निर्माण के लिए लिखित आदेश जारी नहीं किए गए, तो समस्त ग्रामवासी विद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी करेंगे और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने यह भी चेतावनी दी है कि आंदोलन के दौरान विद्यालय में किसी भी प्रकार का पठन-पाठन नहीं होने दिया जाएगा तथा अभिभावक और छात्र-छात्राएं स्कूल परिसर के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने या किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।ग्रामीणों का कहना है कि वे बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन लगातार उपेक्षा के कारण अब आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हैं। यदि प्रशासन समय रहते गंभीरता नहीं दिखाता है, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।

