दशहरा 2026: विजयादशमी पर जरूर करें श्रीराम चालीसा का पाठ, यहां पढ़ें संपूर्ण पाठ और भगवान राम की आरती

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Dussehra 2026 Puja: हिंदू धर्म में विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। इस पावन अवसर पर भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना, श्रीराम चालीसा का पाठ और आरती करने का विशेष महत्व बताया गया है।

मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रभु श्रीराम का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को सद्कर्मों की प्रेरणा प्राप्त होती है। विजयादशमी के अवसर पर आप भी भगवान राम की आराधना कर सकते हैं। यहां पढ़ें श्रीराम चालीसा, भगवान श्रीराम की आरती और उनके प्रमुख मंत्र।

श्रीराम चालीसा का पाठ

॥ चौपाई ॥

श्री रघुबीर भक्त हितकारी।
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

निशि दिन ध्यान धरै जो कोई।
ता सम भक्त और नहीं होई॥

ध्यान धरें शिवजी मन मांही।
ब्रह्मा, इन्द्र पार नहीं पाहीं॥

दूत तुम्हार वीर हनुमाना।
जासु प्रभाव तिहुं पुर जाना॥

जय, जय, जय रघुनाथ कृपाला।
सदा करो संतन प्रतिपाला॥

तुव भुजदण्ड प्रचण्ड कृपाला।
रावण मारि सुरन प्रतिपाला॥

तुम अनाथ के नाथ गोसाईं।
दीनन के हो सदा सहाई॥

ब्रह्मादिक तव पार न पावैं।
सदा ईश तुम्हरो यश गावैं॥

चारिउ भेद भरत हैं साखी।
तुम भक्तन की लज्जा राखी॥

गुण गावत शारद मन माहीं।
सुरपति ताको पार न पाहिं॥

नाम तुम्हार लेत जो कोई।
ता सम धन्य और नहीं होई॥

राम नाम है अपरम्पारा।
चारिहु वेदन जाहि पुकारा॥

गणपति नाम तुम्हारो लीन्हो।
तिनको प्रथम पूज्य तुम कीन्हो॥

शेष रटत नित नाम तुम्हारा।
महि को भार शीश पर धारा॥

फूल समान रहत सो भारा।
पावत कोऊ न तुम्हरो पारा॥

भरत नाम तुम्हरो उर धारो।
तासों कबहूं न रण में हारो॥

नाम शत्रुहन हृदय प्रकाशा।
सुमिरत होत शत्रु कर नाशा॥

लखन तुम्हारे आज्ञाकारी।
सदा करत सन्तन रखवारी॥

ताते रण जीते नहिं कोई।
युद्ध जुरे यमहूं किन होई॥

महालक्ष्मी धर अवतारा।
सब विधि करत पाप को छारा॥

सीता राम पुनीता गायो।
भुवनेश्वरी प्रभाव दिखायो॥

घट सों प्रकट भई सो आई।
जाको देखत चन्द्र लजाई॥

जो तुम्हरे नित पांव पलोटत।
नवो निद्धि चरणन में लोटत॥

सिद्धि अठारह मंगलकारी।
सो तुम पर जावै बलिहारी॥

औरहु जो अनेक प्रभुताई।
सो सीतापति तुमहिं बनाई॥

इच्छा ते कोटिन संसारा।
रचत न लागत पल की बारा॥

जो तुम्हरे चरणन चित लावै।
ताकी मुक्ति अवसि हो जावै॥

सुनहु राम तुम तात हमारे।
तुमहिं भरत कुल पूज्य प्रचारे॥

तुमहिं देव कुल देव हमारे।
तुम गुरु देव प्राण के प्यारे॥

जो कुछ हो सो तुमहिं राजा।
जय जय जय प्रभु राखो लाजा॥

राम आत्मा पोषण हारे।
जय जय जय दशरथ के प्यारे॥

जय जय जय प्रभु ज्योति स्वरुपा।
निर्गुण ब्रह्म अखण्ड अनूपा॥

सत्य सत्य जय सत्यव्रत स्वामी।
सत्य सनातन अन्तर्यामी॥

सत्य भजन तुम्हरो जो गावै।
सो निश्चय चारों फल पावै॥

सत्य शपथ गौरीपति कीन्हीं।
तुमने भक्तिहिं सब सिधि दीन्हीं॥

ज्ञान हृदय दो ज्ञान स्वरुपा।
नमो नमो जय जगपति भूपा॥

धन्य धन्य तुम धन्य प्रतापा।
नाम तुम्हार हरत संतापा॥

सत्य शुद्ध देवन मुख गाया।
बजी दुन्दुभी शंख बजाया॥

सत्य सत्य तुम सत्य सनातन।
तुम ही हो हमरे तन-मन धन॥

याको पाठ करे जो कोई।
ज्ञान प्रकट ताके उर होई॥

आवागमन मिटै तिहि केरा।
सत्य वचन माने शिव मेरा॥

और आस मन में जो होई।
मनवांछित फल पावे सोई॥

तीनहुं काल ध्यान जो ल्यावै।
तुलसी दल अरु फूल चढ़ावै॥

साग पत्र सो भोग लगावै।
सो नर सकल सिद्धता पावै॥

अन्त समय रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि भक्त कहाई॥

श्री हरिदास कहै अरु गावै।
सो बैकुण्ठ धाम को पावै॥

॥ दोहा ॥

सात दिवस जो नेम कर, पाठ करे चित लाय।

हरिदास हरि कृपा से, अवसि भक्ति को पाय॥

राम चालीसा जो पढ़े, राम चरण चित लाय।

जो इच्छा मन में करै, सकल सिद्ध हो जाय॥

भगवान श्रीराम की आरती

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।

नव कंज लोचन, कंज मुख, करकंज पद कंजारुणम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।

पट पीत मानहुं तड़ित रुचि-शुचि, नौमि जनक सुतावरम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

भजु दीनबंधु दिनेश, दानव दैत्य वंश निकन्दनम्।

रघुनन्द आनन्द कन्द, कौशलचन्द्र दशरथ नन्दनम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु, उदारु अंग विभूषणम्।

आजानुभुज शर चाप-धर, संग्राम जित खरदूषणम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

इति वदति तुलसीदास, शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।

मम हृदय कंज निवास कुरु, कामादि खल दल गंजनम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

मन जाहि राचेऊ मिलहि सो वर, सहज सुन्दर सांवरो।

करुणा निधान सुजानशील, सनेह जानत रावरो॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

एहि भाँति गौरी असीस सुनि, सिय सहित हिय हरषित अली।

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि, मुदित मन मन्दिर चली॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

भगवान श्रीराम के प्रमुख मंत्र

विजयादशमी के दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान श्रीराम के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

1. श्रीराम मंत्र

ॐ श्री रामचन्द्राय नमः।

2. श्रीराम नाम मंत्र

ॐ श्री रामाय नमः॥

3. राम बीज मंत्र

ॐ रां रामाय नमः।

4. श्रीराम स्तुति मंत्र

श्रीरामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥

5. श्रीराम नाम जाप

श्री राम, जय राम, जय जय राम।

विजयादशमी पर श्रीराम की पूजा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी पर भगवान श्रीराम का स्मरण और पूजन धर्म, सत्य, मर्यादा तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दिन श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ अपने जीवन में अच्छे विचारों और सकारात्मक आचरण को अपनाने का संकल्प भी ले सकते हैं।

दशहरे का संदेश है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाना ही इस पर्व की भावना को सार्थक बनाता है।

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