जंगली जानवरों के बढ़ते विचरण से ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग से ठोस सुरक्षा उपायों की उम्मीद
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : छुरा विकासखंड क्षेत्र में जंगली जानवरों की बढ़ती मौजूदगी अब ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। जंगल और पहाड़ी इलाकों तक सीमित रहने वाले वन्यजीवों का रिहायशी क्षेत्रों के आसपास पहुंचना ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। बीती रात ग्राम रूवाड़ में एक तेंदुए ने कृषक जागेश्वर नागेश के घर की बाड़ी में बंधे बछड़े का शिकार कर लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलने के बाद घरों से बाहर निकलना भी जोखिम भरा महसूस होने लगा है। जिस तरह तेंदुआ गांव के भीतर पहुंचकर पालतू पशु का शिकार कर रहा है, उससे ग्रामीणों में अपने परिवार और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
घर और बाड़ी तक पहुंच रहे वन्यजीव
क्षेत्र में वन्यजीवों की सक्रियता लगातार ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब खतरा केवल जंगल जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जंगली जानवर गांव और रिहायशी इलाकों के आसपास तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और खेत-बाड़ी में काम करने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता की जरूरत महसूस की जा रही है।
भालू के हमलों के बाद तेंदुए की दस्तक ने बढ़ाई चिंता
क्षेत्र में हाल के दिनों में भालू के हमलों की घटनाओं ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ाई है। कई ग्रामीणों के घायल होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जबकि रसेला क्षेत्र में एक ग्रामीण की मौत की घटना हुई तो हाटमौहा में भी जंगली जानवर के हमले से एक महिला की मौत हो चुकी है और अभी भी ये घटना ग्रामीणों के जेहन में है। अब रूवाड़ में तेंदुए द्वारा बछड़े का शिकार किए जाने से वन्यजीवों की बढ़ती सक्रियता को लेकर ग्रामीणों में भय का वातावरण है।
क्या पिंजरे और तार-जाली से हो सकती है सुरक्षा?
ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए अब सवाल यह है कि वन विभाग वन्यजीवों को रिहायशी इलाकों से दूर रखने के लिए कौन से प्रभावी कदम उठाता है। जिन गांवों में तेंदुए, भालू या अन्य वन्यजीवों का अधिक विचरण रहता है, वहां आवश्यकता के अनुसार पिंजरे लगाने, कैमरा ट्रैप से निगरानी बढ़ाने, रात्रिकालीन गश्त करने और संवेदनशील स्थानों को चिह्नित करने जैसे उपाय किए जा सकते हैं।इसके अलावा, अत्यधिक संवेदनशील गांवों में ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए तार-जाली अथवा अन्य सुरक्षित बैरियर लगाने की व्यवहारिकता का भी वन विभाग तकनीकी स्तर पर परीक्षण कर सकता है। हालांकि कौन-सा उपाय किसी क्षेत्र के लिए उपयुक्त होगा, इसका निर्णय वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग की स्थानीय परिस्थितियों के आकलन के आधार पर ही किया जाना उचित होगा।
ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग केवल घटना के बाद मौके पर पहुंचने तक सीमित न रहे, बल्कि संवेदनशील गांवों की पहचान कर पूर्व तैयारी और नियमित निगरानी की व्यवस्था करे, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को समय रहते रोका जा सके।अब देखना होगा कि रूवाड़ में तेंदुए द्वारा बछड़े के शिकार की घटना के बाद वन विभाग क्या ठोस कदम उठाता है और ग्रामीणों को सुरक्षा का भरोसा किस तरह दिलाया जाता है। वन्यजीवों का संरक्षण जरूरी है, लेकिन इसके साथ ग्रामीणों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।




