सक्ति: सक्ती जिले के चंद्रपुर में स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर भक्तों की अटूट श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। नवरात्रि के अलावा भी यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। मान्यता है कि माता की कृपा से यहां आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति के लिए यह मंदिर प्रसिद्ध है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए पहुंचते हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सती का बायां कपोल महानदी के पास स्थित इस पहाड़ी क्षेत्र में गिरा था, जिसके बाद इस स्थान को शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठा मिली। मां चंद्रहासिनी देवी को सर्वसिद्धि दायिनी कहा जाता है, और भक्तों का विश्वास है कि उनकी उपासना से हर प्रकार की मनोकामना पूरी होती है। छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं।
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी – हम तों मौन नही रहेंगे...हर राज खोलेंगे
मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है, और यहां मां चंद्रहासिनी की प्रतिमा दो हजार वर्षों से भी अधिक पुरानी मानी जाती है। खासकर संतान की कामना रखने वाले भक्तों के लिए यह मंदिर विशेष महत्व रखता है। जनश्रुति है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसकी झोली मां की कृपा से संतान सुख से भर जाती है। यही कारण है कि दंपत्ति यहां विशेष पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं।नवरात्रि के दौरान यहां 108 दीपों के साथ विशेष महाआरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो जाता है। मां चंद्रहासिनी की महिमा इतनी अद्भुत मानी जाती है कि भक्तजन जयकारों के साथ उनकी आराधना करते हैं और मां का आशीर्वाद पाकर जीवन को धन्य मानते हैं।
नवरात्रि के दौरान यहां 108 दीपों के साथ विशेष महाआरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हो जाता है। मां चंद्रहासिनी की महिमा इतनी अद्भुत मानी जाती है कि भक्तजन जयकारों के साथ उनकी आराधना करते हैं और मां का आशीर्वाद पाकर जीवन को धन्य मानते हैं।
ये भी पढ़े : निपानी में रामनवमी के पावन पर्व पर निकाली जाएगी भव्य शोभायात्रा
Comments