पहलगाम हमले के बाद केंद्र के फैसले पर फारुख अब्दुल्ला ने जताई आपत्ति,कही ये बात 

पहलगाम हमले के बाद केंद्र के फैसले पर फारुख अब्दुल्ला ने जताई आपत्ति,कही ये बात 

जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का आदेश दे दिया था। अब सरकार के इस आदेश पर जम्मू-कश्मीर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता फारुख अब्दुल्ला ने आपत्ति जताई है।उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे अमानवीय और मानवता के खिलाफ बताया है, खासतौर पर ऐसे मामलों के लिए, जिसमें लोग दशकों से भारत में शांति पूर्ण तरीके से रह रहे हैं।

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मीडिया से बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दशकों से भारत में रह रहे नागरिकों के प्रति अपनी सहानुभूति जताई। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार द्वारा की गई यह कार्रवाई अच्छी नहीं है। यह मानवता के खिलाफ है। कई लोग हैं जो यहां पर 70 या 25 सालों से रह रहे हैं.. उनके बच्चे यहां पर ही हैं.. उन्होंने कभी भारत को नुकसान नहीं पहुंचाया.. हमेशा एक अच्छे नागरिक बनकर रहे हैं, उन्होंने खुद ही अपने आप को भारत के हवाले किया है, ऐसे में उनको वापस भेज देना सही नहीं है।"

अब्दुल्ला ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे तनाव पर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि कल क्या होगा। आज, दो देश लड़ाई करने के लिए तैयार हो रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना होगा कि ऐसा न हो और उन्हें (आतंकवादियों को) और इस हमले के पीछे जो लोग हैं, उन्हें पकड़ने के लिए कोई सीधा रास्ता निकाला जा सके।"

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इसी बीच एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 24 अप्रैल को सरकार द्वारा पाकिस्तानी नागिरकों को गाइडलाइन जारी की गई थी। इसके छह दिनों के अंदर अटारी-वाघा सीमा के माध्यम से करीब 786 पाकिस्तानी नागरिक भारत छोड़ चुके हैं। इसी दौरान करीब 1376 भारतीय नागरिक भी पाकिस्तान से वापस अपने देश लौट आए हैं। हालांकि गुरुवार को डेडलाइन खत्म होने के बाद से ही पाकिस्तान की तरफ से सीमा को बंद कर दिया गया, जिसकी वजह से कई नागरिक बॉर्डर पर फंस गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक अटारी बॉर्डर पर फिलहाल 70 पाकिस्तानी नागरिक बैठे हुए हैं।







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