कतरनी धान उपज करने वाले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है. इन किसानों की आमदनी दोगुनी होने वाली है. ये कमाल बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कर दिखाया है. जहां पहले कतरनी धान की उपज कम मात्रा में होती थी वहीं अब यह उपज डेढ़ गुना अधिक होगी. बिहार कृषि विश्वविद्यालय किसानों के फायदे के लिए लगातार काम करते रहती है. ऐसे में खासकर अभी नए किस्म के बीजों को पर सबसे अधिक खोज किया जा रहा है. जहां धान की पैदावार कम होती थी वहां अब इसकी पैदावार अधिक होगी.
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कौन से किस्म के बीज को किया तैयार
कृषि विश्वविद्यालय पहले भी कई तरह के बीज को विकसित कर चुका है. ऐसे में अब कतरनी को सबौर कतरनी धान-1 के नाम से तैयार किया है जो कई मायनों में अलग है. बीज का यह टाइप बीएयू के वैज्ञानिक मनकेश एवम उनकी टीम ने विकसित किया है. इस धान की खासियत है कि यह आम कतरनी से बिल्कुल अलग है. क्योंकि यह कतरनी अगर 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज होगी तो सबौर 1 इससे डेढ़ गुना अधिक उपज देगी. इससे किसानों को उसी लागत में अधिक पैदावार मिलेगा. इतना ही नहीं किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी.
अधिक खुशबू से लगते हैं कीड़े
बीएयू के कुलपति डॉ दुनियाराम सिंह बताते हैं कि कतरनी में कीड़े अधिक लगते हैं क्योंकि इसकी खुश्बू से आकर्षित होकर इसमें कीड़े लगते हैं. लेकिन यह बीज जो तेयार किया इसमें काफी कम कीट लगेगा. अभी यूनिवर्सिटी परिसर में इसकी बुआई भी की गई है. अभी जो भी किसान इसकी खेती करेंगे, बीएयू के वैज्ञानिक उसकी देखभाल करेंगे. सबसे खास बात यह है कि कम पानी में भी यह अच्छी उपज देगा.
कतरनी को मिला है जीआई
आपको बता दें कि कतरनी चावल को जीआई प्राप्त है. भागलपुर के जगदीशपुर से सटे इलाकों को धान का कटोरा कहा जाता है. क्योकि यहां पर बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है. लेकिन जगदीशपुर खासकर कतरनी धान के लिए फेमस है.
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