पलामू : खरीफ सीजन में इस बार पलामू समेत आस-पास के जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है, जिस कारण टांड़ वाले खेतों का आच्छादन नहीं हो सका है. झारखंड के लगभग सभी जिलों में यह स्थिति बनी हुई है. ऐसे में किसान अब भी टांड़ वाले खेतों में बुआई कर सकते हैं. दरअसल, खरीफ सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा होने से किसानों द्वारा टांड़ वाले खेतों में खेती नहीं हो पाई है. हालांकि ऐसे में भी किसान अरहर की बुआई कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि अगर टांड़ वाले खेतों में अब भी बुआई की जाए तो किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है.
कब तक कर सकते हैं बुआई
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने बताया कि टांड़ वाले खेत जो खाली रह गए हैं, वहां किसान अभी भी अरहर की बुआई कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि 2009 से 2011 तक क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी में एक रिसर्च हुआ था, जिसमें बीजों को अलग-अलग समय पर रोपाई की गई थी.
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उसमें अरहर के बीजों को 5 सितंबर तक लगाया गया था, जिससे यह पता चला था कि अरहर के बीजों को 5 सितंबर तक रोपाई की जा सकती है, जिससे लगभग 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिलता है.
बीज उपचार जरूर करें
आगे कहा कि अगर आप अरहर की खेती कर रहे हैं, तो बीज उपचार जरूर करें. बीज उपचार फसलों के लिए टीकाकरण का काम करता है, जिससे बीजों और फसलों में लगने वाले कीड़े से बचाव हो सकता है. अरहर की खेती के लिए किसान 5 सितंबर तक बुआई कर सकते हैं, जिससे उन्हें अच्छा और बेहतर मुनाफा मिलेगा.
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इस विधि से करें खेती
आगे कहा कि अरहर की खेती किसान छींटा विधि से करते हैं, जिसमें ज्यादा बीज दर लगता है. छींटा विधि में 8 किलो प्रति एकड़ की दर से बीज दर लगता है, वहीं इस विधि में 5 किलो प्रति एकड़ बीज दर लगता है. इससे किसान एक एकड़ में 60 से 70 हजार रुपए तक मुनाफा कमा सकते हैं. इसका लागत खर्च 12 से 15 हजार प्रति एकड़ आता है.

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