बिलासपुर : उसलापुर रेलवे स्टेशन में यात्रियों से बदसलूकी ठेकेदार द्वारा माननी वसूली जारी

बिलासपुर : उसलापुर रेलवे स्टेशन में यात्रियों से बदसलूकी ठेकेदार द्वारा माननी वसूली जारी


बिलासपुर : उसलापुर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में मनमानी वसूली और गुंडागर्दी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ठेकेदार के कर्मचारी यात्रियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं और तय से ज्यादा से शुल्क वसूल रहे । शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन स्थिति में सुधार अब तक नहीं दिखा है।

उसलापुर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में अवैध वसूली और बदमाश प्रवृत्ति के लोगों का दबदबा बना हुआ है। रेलवे ने मोटरसाइकिल स्टैंड का ठेका गरीब नवाज़ एंटरप्राइजेज, कल्याण पश्चिम (मुंबई) को दिया है, लेकिन मुख्य ठेकेदार ने इसे रीवा की एक पार्टी को पेटी कांट्रेक्टर को दे रखा है। इतना ही नहीं, पेटी कांट्रेक्टर ने आगे इसे शहर के ही गुंडा तत्वों को ऑपरेट करने के लिए सौंप दिया है।

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यानी पार्किंग चलाने में ठेका… उसके ऊपर ठेका… और उसके ऊपर फिर एक और ठेका! नतीजा जवाबदेही शून्य और मनमानी चरम पर। रोजाना, साप्ताहिक और मासिक पार्किंग शुल्क मनमाने तरीके से वसूल किया जा रहा हैं। बूम बैरियर और ड्रॉप-एंड-गो के नाम पर भी जमकर वसूली हो रही है। हाईकोर्ट पहले ही पार्किंग व्यवस्था सुधारने पर रेलवे को फटकार लगा चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं। शिकायतें रेलवे अधिकारियों तक लगातार पहुंच रही हैं, कार्रवाई भी होती है, लेकिन ठेकेदार के गुर्गों की दबंगई कम होने का नाम नहीं ले रही।

जब इस पूरे मामले पर बिलासपुर रेलवे मंडल के सीनियर डीसीएम से सवाल किया गया, तो उन्होंने माना कि शिकायतें मिल रही हैं। हमारे पास कई माध्यमों स्टेशन, Rail Madad, 139 और सोशल मीडिया से शिकायतें पहुंच रही हैं। जो भी reported complaints हैं, उन पर कार्रवाई की जाती है। कुछ शिकायतें भ्रामक भी होती हैं, लेकिन किसी भी प्रमाणित शिकायत को अनदेखा नहीं किया जाता।

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पार्किंग शुल्क को लेकर जो रेट लिस्ट है, वह रेलवे अप्रूव्ड है और सार्वजनिक रूप से डिस्प्ले की गई है। यात्रियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे गाड़ी लगाते समय लागू रेट को देखें और समझें। ठेकेदार को भी स्पष्ट जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे की ओर से कार्रवाई के दावे भले ही किए जा रहे हों, लेकिन उसलापुर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में अवैध वसूली और गुंडागर्दी का खेल अब भी जारी है। सवाल ये है कि ठेका व्यवस्था में चल रही इस “पेटी प्रणाली” पर कब लगाम लगेगी और यात्रियों को कब मिलेगी राहत?







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