सफलता की कहानी :हरदास नाला मिलीवाटरशेड परियोजना ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

सफलता की कहानी :हरदास नाला मिलीवाटरशेड परियोजना ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

बेमेतरा टेकेश्वर दुबे :  प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY-WDC 2.0/2) के अंतर्गत स्वीकृति वर्ष 2022-23 में प्रारंभ की गई हरदास नाला मिलीवाटरशेड परियोजना बेमेतरा जिले के ग्रामीण अंचल में बड़े बदलाव का कारण बनी है। 19 ग्रामों के 7300 हेक्टेयर क्षेत्र में किए गए व्यापक मृदा एवं जल संरक्षण कार्यों ने किसानों की जिंदगी में नई उम्मीद जगाई है। 1606.01 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई की कमी वाले कन्हार, मटासी एवं मुरम युक्त क्षेत्रों में वर्षाजल संचयन, भू-क्षरण रोकथाम और भू-जलस्तर को बढ़ाना था, जिसमें जिले ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

जनजागरूकता से शुरुआत—जल संरक्षण का बना जनआंदोलन
परियोजना की शुरुआत ग्रामीणों में जागरूकता लाकर की गई। रिचार्ज पीट निर्माण के चलते कई गांवों के हैंडपंप गर्मियों में भी सतत पानी देने लगे, जिससे ग्रामीणों की पेयजल समस्या काफी हद तक दूर हुई। वहीं, ‘रीज टू वेली’ कॉन्सेप्ट के तहत जल को ऊँचाई से नीचे तक सुरक्षित रूप से बहाने और संग्रहित करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम किया गया।

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इन्फ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विकास—गांवों में बने स्थायी जलस्रोत
परियोजना के कार्य चरण में, 21 गली चेक, 05 तालाबों का जीर्णोद्धार, पचरी-पीचिंग, मेंड़ों पर बरगद, नीम, पीपल, बेल के पौधों का रोपण जैसे कार्य किए गए, जिससे ग्रामीणों को स्थायी जलस्रोत उपलब्ध होने लगे। निचले क्षेत्रों में बनाए गए 10 चेक डेम, 01 भूमिगत डाइक से कई बंद पड़े ट्यूबवेल फिर से चालू हो गए और सिंचाई की उपलब्धता में बड़ी वृद्धि हुई। किसानों को अब खरीफ के साथ-साथ रबी की फसलों के लिए भी पर्याप्त पानी मिल रहा है।

सूक्ष्म सिंचाई तकनीक से बढ़ी पैदावार—480 किसानों को मिला लाभ
परियोजना अंतर्गत 480 किसानों को ड्रिप, स्प्रिंकलर एवं सबमर्सिबल पंप प्रदान किए गए। इसके परिणामस्वरूप कई किसानों ने गेंदा, सब्जियों, केला, पपीता जैसी व्यावसायिक फसलों में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया। सूक्ष्म सिंचाई तकनीक ने किसानों की लागत कम की और आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

महिला सशक्तिकरण—समूहों को मिली मजबूती, बढ़ा आत्मनिर्भरता का मार्ग
आजीविका संवर्धन के अंतर्गत 57 महिला स्व-सहायता समूहों, 15 ग्रामीण उद्यमियों को चक्रीय निधि प्रदान की गई। इसमें मत्स्य पालन, वर्मी कम्पोस्ट, साबुन निर्माण, किराना एवं फैंसी स्टोर जैसे व्यवसायों को बढ़ावा मिला। चिखली और बनियाडीह क्षेत्र में आत्मनिर्भर समूहों द्वारा अंतवर्तीय फसलों का उत्पादन कर अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त की जा रही है।

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परियोजना की प्रमुख उपलब्धियाँ
मृदा एवं जल संरक्षण से भूमि की उर्वरता बढ़ी, बंजर भूमि संरक्षण हुआ। भू-जलस्तर में वृद्धि, कई बंद नलकूप पुनः चालू हुए। ग्रामीणों को रोजगार एवं आय के नए अवसर मिले। फसल चक्र में सुधार, किसान अब रबी में गेहूं, चना जैसी फसलें ले पा रहे हैं। महिलाओं को आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिली।

ग्रामीण विकास का बना नया मॉडल
हरदास नाला मिलीवाटरशेड परियोजना ने बेमेतरा जिले के 19 ग्रामों में न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाया, बल्कि जल-संरक्षण, सिंचाई विस्तार, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में भी सकारात्मक और स्थायी बदलाव हुए हैं।
यह परियोजना ग्रामीण विकास का ऐसा मॉडल बनकर उभरी है, जिसने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।









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