परमेश्वर राजपूत गरियाबंद : जिले के छुरा विकासखण्ड सहित पूरे गरियाबंद जिले में इस बार धान बेचने को लेकर किसानों की परेशानी चरम पर है। एग्रीस्टेक पंजीयन में तकनीकी दिक्कतें, ‘कैरी फारवर्ड’ का समाधान न होना और दस्तावेज़ सत्यापन में देरी की वजह से हजारों किसान धान बेचने से अब तक वंचित हैं। शासन द्वारा धान खरीदी प्रारंभ होने के बाद भी बड़ी संख्या में किसानों का पंजीयन अधूरा है, जिससे वे समर्थन मूल्य पर धान बेच नहीं पा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि एग्रीस्टेक पोर्टल में लगातार त्रुटि आने से न तो नया पंजीयन हो पा रहा है और न ही पुराने पंजीयन का नवीनीकरण। स्थिति यह है कि किसान सहकारी समिति, पटवारी कार्यालय और तहसील कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने को मजबूर हो गए हैं। कई किसान धान की कटाई-मिंजाई छोड़कर दिनभर सरकारी दफ्तरों में लाइन लगाने को विवश हैं, लेकिन फिर भी समाधान नहीं मिल पा रहा।
इधर ‘कैरी फारवर्ड’ की समस्या भी किसानों पर भारी पड़ रही है। कई किसानों के नाम पोर्टल में पिछले वर्ष का धान स्टॉक दिखा रहा है, जिससे नए वर्ष का पंजीयन अटक गया है। किसानों का कहना है कि यह त्रुटि विभागीय है, पर इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
किसानों ने बताया कि प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिया जा रहा है। न सहकारी समिति के कर्मचारियों के पास संतोषजनक जवाब है और न ही तहसीलदार एवं वरिष्ठ अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट हो पा रही है। इससे किसानों में भारी आक्रोश और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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किसान यह भी आशंका जता रहे हैं कि यदि समय रहते पंजीयन संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित रह जाएंगे, जिससे आर्थिक संकट और बढ़ सकता है।
किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि एग्रीस्टेक पोर्टल की तकनीकी खराबियों को तुरंत ठीक किया जाए, ‘कैरी फारवर्ड’ जैसी त्रुटियों का समाधान किया जाए और जिले में विशेष प्रशासनिक शिविर लगाकर किसानों को राहत दी जाए। साथ ही स्पष्ट आदेश जारी कर यह बताया जाए कि जिन किसानों का पंजीयन लंबित है, उनके धान खरीद को लेकर क्या व्यवस्था की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती परेशानी को देखते हुए किसान संगठन भी अब आंदोलन की चेतावनी देने लगे हैं। यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।



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