नई दिल्ली : गेहूं की नई किस्म जल्द ही मार्केट में आने वाली है. दिसंबर में ही इन नई किस्मों को लॉन्च कर दिया जाएगा. जो किसानों की आय को दोगुना करेंगी. यह उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली होंगी, उच्च गुणवत्ता और उच्च उत्पादन देंगी. यह जानकारी दी है दिल्ली के पूसा में चल रहे छठे अंतर्राष्ट्रीय सस्य विज्ञान कांग्रेस में हरियाणा के करनाल से आए भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान के डॉ. मंगल सिंह जोकि मुख्य तकनीकी अधिकारी हैं. वह विभिन्न प्रकार की किस्में गेहूं और जौ की लेकर के आए हुए हैं, जिसे देखकर हर कोई हैरान है.
सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में होता है. यहीं की नई वैरायटी देशभर में तहलका मचाती है. गेहूं की जो नई किस्में है उसे तैयार किया गया है हरियाणा, झारखंड, पंजाब और दिल्ली के वैज्ञानिकों ने. गेहूं की नई किस्में गेहूं की खेती में क्रांति लाएंगी और दिशा और दशा भी बदल देंगी.
खास है नई किस्में
मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. मंगल सिंह ने बताया कि यह नई गेहूं की वैरायटी का नाम डीबी डब्ल्यू 386, डी डब्ल्यू आरबी, डीबी डब्ल्यू 359, डीबी डब्ल्यू 377, डीडी डब्ल्यू 55, डी डब्ल्यू आरबी 233 है. इनकी खासियत यह है कि यह उच्च उत्पादन वाली वैरायटी है. इनकी गुणवत्ता भी सबसे अच्छी है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी उनकी बहुत अच्छी है. इन वैरायटी के जरिए किसान अपनी आय को दोगुनी कर सकता है. यह 80 कुंतल की उपज की हैं. उन्होंने बताया कि कुछ जौ की भी नई वैरायटी विकसित की गई है, जो बिना छिलके वाली हैं. यानी छिलका रहित वैरायटी विकसित की गई है. उन्होंने बताया कि गेहूं में डीबी डब्ल्यू 386 बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड के लिए बेस्ट.
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किसान और लोग दोनों को फायदा
डॉ. मंगल सिंह ने बताया कि जिस तरह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है उसमें यह नई गेहूं की वैरायटी आसानी से विकसित, आसानी से उत्पादन और आसानी से फायदा पहुंचाएगी. लोगों की सेहत के लिए भी ये नई वैरायटी बहुत अच्छी है. जबकि किसानों की इससे आए भी दुगनी होगी और उन्हें उत्पादन भी ज्यादा से ज्यादा मिलेगा. उन्होंने बताया कि गेहूं की इन नई वैरायटी का मुकाबला कोई भी वैरायटी नहीं कर पाएगी. उन्होंने बताया कि उनका संस्थान भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान गेहूं की विभिन्न प्रकार की वैरायटी तैयार करता है.



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