बिलासपुर: बिलासपुर में आज राजनीतिक हलचल अपने चरम पर रहने वाली है। कांग्रेस ने गुरुवार 27 नवंबर को दोपहर 12 बजे कलेक्टर कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है, जिसे वह “जन–अधिकार आंदोलन” का रूप दे रही है। कांग्रेस भवन से निकलने वाला यह जुलूस जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर ग्रामीण के अध्यक्ष विजय केशरवानी के नेतृत्व में कलेक्टर ऑफिस तक पहुँचेगा, जहाँ सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोला जाएगा।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जिले में जर्जर सड़कों से लेकर बिजली बिलों की बढ़ोतरी तक, प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह चरमराया हुआ है। पार्टी का कहना है कि सड़कों की मरम्मत केवल घोषणाओं तक सीमित है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में हालात बदतर बने हुए हैं। वहीं महंगे बिजली बिलों को कांग्रेस ने “आम जनता की जेब पर डाका” बताया है। शिकायतों पर सुनवाई तक न होने को लेकर भी पार्टी ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।
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धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था, लंबी कतारें, बारदाने की कमी और किसानों की परेशानियों को कांग्रेस ने सबसे बड़ा मुद्दा बताकर सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया है। इसी के साथ रजिस्ट्री दरों में वृद्धि और छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री पर अघोषित रोक को “जन विरोधी नीति” बताया गया है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि गरीब बस्तियों में बुलडोज़र चलाकर सरकार विकास नहीं, बल्कि उजाड़ अभियान चला रही है, जिससे झुग्गी–बस्तियों में भारी आक्रोश है।
लिंगियाडीह–दुर्गा नगर में प्रस्तावित तोड़फोड़ के विरोध में पूर्व विधायक शैलेश पांडे खुद मैदान में उतर चुके हैं। उनके समर्थन से इलाके की महिलाओं में खासा उत्साह दिख रहा है और बड़ी संख्या में महिलाएं घेराव में शामिल होने की तैयारी कर रही हैं। कांग्रेस इसे “जनता की आवाज़ को शक्ति देने” वाला कदम बता रही है
राजनीतिक संदेश साफ है—कांग्रेस अब सीधे सड़कों पर उतरकर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रही है। स्थानीय असंतोष, प्रशासनिक अव्यवस्था और सरकारी कार्रवाइयों के प्रति बढ़ती नाराज़गी को वह अपने संगठनात्मक बल के साथ जोड़कर प्रदर्शित करना चाहती है।
कलेक्टर कार्यालय के घेराव में कितनी भीड़ जुटती है, यह आने वाले दिनों में जिले की राजनीतिक हवा का रुख तय कर सकता है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि हजारों कार्यकर्ता, महिलाएं और प्रभावित परिवार इसमें हिस्सा लेंगे, जबकि भाजपा की ओर से इस बढ़ते जनाक्रोश को लेकर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।



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