हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। हर महीने की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। जब यह त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत का सीधा संबंध मंगल ग्रह से होता है, और यह विशेष रूप से कर्ज मुक्ति के लिए बहुत फलदायी माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार प्रदोष व्रत 02 दिसंबर को रखा जाएगा। आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।
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पूजा विधि
भौम प्रदोष के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। शाम के समय, प्रदोष काल में साफ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। शिव जी को ऊपर बताई गई सभी चीजें अर्पित करें। इसके बाद शिव चालीसा व 'ॐ ऋणमुक्तेश्वर महादेवाय नमः' मंत्र का जाप करें। अंत में, आरती करें और सभी में प्रसाद बांटें।
भौम प्रदोष व्रत का श्रद्धापूर्वक उपवास रखने से भगवान शिव और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे न केवल आर्थिक संकट दूर होते हैं, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।



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