सरकार के मानवीय निर्णय बने बदलाव की आधारशिला: दिव्यांगजन से मातृशक्ति तक-26 हजार परिवारों को मिला नया आसमान

सरकार के मानवीय निर्णय बने बदलाव की आधारशिला: दिव्यांगजन से मातृशक्ति तक-26 हजार परिवारों को मिला नया आसमान

एमसीबी : छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के लिए वर्ष 2024-25 सामाजिक सुरक्षा, संवेदनशीलता और मानव-कल्याण की दृष्टि से अभूतपूर्व उपलब्धियों का वर्ष साबित हुआ। यह वह समय रहा जब सरकारी योजनाएँ केवल कागज़ों पर नहीं रहीं, बल्कि लोगों के जीवन को स्पर्श करते हुए उन्हें वास्तविक सुरक्षा, स्थिरता और सम्मान प्रदान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र को जिस गम्भीरता से राज्य सरकार ने अपनाया, उसमें एमसीबी जिला पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व, समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की संवेदनशील कार्यशैली और जिला प्रशासन की मेहनत ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया, जहाँ योजनाएँ परिवारों की तकदीर बदलने का माध्यम बन सकीं।एमसीबी जिला अपनी भौगोलिक विविधताओं, मेहनतकश समुदाय और प्राकृतिक संपदा के लिए पहले से प्रतिष्ठित रहा है, परंतु सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में आए तीव्र परिवर्तन ने इस जिले की पहचान को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है। यह वह प्रशासकीय कार्यशैली है, जिसका केन्द्र यह सुनिश्चित करना रहा कि जिले का कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में अकेला, असुरक्षित या उपेक्षित महसूस न करे।

26,337 पेंशन-सहायता नहीं, बल्कि सम्मान की पुनर्स्थापना
पेंशन योजनाओं के माध्यम से 26,337 लोगों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा आई। यह योजनाएँ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान की रक्षा करने वाला संबल बनीं। 6,704 बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन ने दवाइयों से लेकर दैनंदिन खर्चों तक भरोसे का सहारा दिया। 3,442 विधवा माताओं को कठिन परिस्थितियों में नई शक्ति मिली, यह एहसास हुआ कि समाज और सरकार उनके साथ है। 334 दिव्यांगजन, जो रोजमर्रा की चुनौतियों से जूझते रहते हैं, पेंशन की मदद से अपने जीवन को अधिक आत्मनिर्भरता के साथ जी पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिव्यांग शब्द को अपनाना केवल शब्दावली नहीं, बल्कि सम्मानजनक दृष्टिकोण का परिवर्तन था जिसने देशभर में सकारात्मक सामाजिक चेतना पैदा की। इसके अलावा- 2,925 परिवारों को सुखद सहायता योजना ने आकस्मिक संकटों में संभाला। 4,339 लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन और 8,603 नागरिकों को मुख्यमंत्री पेंशन योजना के माध्यम से सम्मानजनक जीवन का अवसर मिला। ये सभी योजनाएं जीवन के संघर्षों को कम करने और लोगों को आत्मविश्वास प्रदान करने में महत्वपूर्ण साबित हुईं।

ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - अपनों की लाशों पे राजनीति लंबी नहीं चलती

501 सहायक उपकरण-स्वतंत्रता की नई रोशनी
दिव्यांगजनों के लिए 501 सहायक उपकरण वितरण इस वर्ष की सबसे मानवीय उपलब्धियों में गिना गया। 152 मोटराइज्ड ट्राइसाइकल अनेक लोगों के लिए स्वतंत्रता, रोज़गार और सामाजिक जुड़ाव का माध्यम बने। 40 श्रवण यंत्र उन परिवारों के लिए वरदान साबित हुए जिनमें किसी सदस्य ने वर्षों बाद अपने प्रियजनों की आवाज़ सुनी। वहीं व्हीलचेयर, ब्रेल स्टिक, छड़ी, बैसाखी और अन्य उपकरणों ने उन लोगों को जीवन की नई दिशा दी जो परिस्थितियों से घिरे हुए थे।

614 UDID कार्ड - डिजिटल पहचान, सरल पहुँच
UDID कार्ड वितरण जिले की डिजिटल उपलब्धियों में मील का पत्थर साबित हुआ। 614 दिव्यांगजन आज विभिन्न सरकारी लाभ, चिकित्सा सुविधाएँ, आरक्षण, रियायतें और सहायक उपकरणों से जुड़े लाभ आसानी से प्राप्त कर रहे हैं। यह कदम डिजिटल इंडिया की भावना को जमीनी स्तर पर स्थापित करता है।

मानव-केन्द्रित प्रशासन-योजनाएं सिर्फ़ लाभ नहीं, बल्कि हक़
जिला समाज कल्याण विभाग का सबसे बड़ा परिवर्तन इसकी मानव-केन्द्रित, सम्मान-प्रधान और पारदर्शी कार्यशैली रही। लाभार्थियों को यह महसूस हुआ कि- वे सहायता नहीं मांग रहे, बल्कि उन्हें उनका हक़ मिल रहा है। प्रक्रियाओं की सरलता, पारदर्शी भुगतान, त्वरित सेवा वितरण और फील्ड स्तर पर कार्यरत टीम की संवेदनशीलता ने प्रशासन के प्रति विश्वास को मजबूत किया है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानवीय नेतृत्व, त्वरित निर्णय और गरीबों के प्रति समर्पण इन उपलब्धियों की आधारशिला रहा। समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की फील्ड-फोकस्ड कार्यशैली ने सुनिश्चित किया कि लाभ समय पर और सही हाथों तक पहुँचे। आज एमसीबी जिले की तस्वीर बदल चुकी है। बुजुर्ग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं, दिव्यांगजन मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं, गरीब वर्ग शासन की योजनाओं से सीधे लाभान्वित हो रहा है। यह बदलाव आँकड़ों से कहीं आगे है। यह उन मुस्कानों में दिखाई देता है जो पहले अनिश्चितता से घिरी थीं।

ये भी पढ़े : ग्रामीण क्षेत्रों में गहन पुनरीक्षण तेज, बीएलओ ने घर-घर जाकर गणना पत्रक किए एकत्रित

ये आँकड़े नहीं, बल्कि बदले हुए जीवन की कहानियाँ हैं
26,337 पेंशन, 501 सहायक उपकरण और 614 UDID कार्ड-ये केवल संख्याएँ नहीं हैं, बल्कि हजारों सपनों को नया आसमान देने वाले मानवीय प्रयासों का प्रतीक हैं। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी नीति, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व, समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की सक्रियता और जिला प्रशासन की ईमानदार कार्यशैली का सशक्त परिणाम है।









You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments