नई दिल्ली : दिल्ली-एनसीआर में हवा जहरीली हो गई है। सांसों पर संकट मंडराने लगा है। राजधानी काले-घने धुएं और धूल की चादर से ढकी है। AQI मीटर 500 पार कर चुका है। हर घर में खांसी और आंख में जलन के मरीज हैं। हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेप-3 लागू कर दिया है।
सभी सरकारी और निजी दफ्तरों को 50 फीसदी कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम करने को कह दिया गया है। ऐसे में सभी के मन में एक सवाल कौंध रहा है कि कभी बीजिंग दिल्ली से ज्यादा वायु प्रदूषित शहर था तो चीन ने बीजिंग में स्मॉग और प्रदूषण को कैसे कम किया?
चीन की राजधानी बीजिंग में 2007 से एयर पॉल्यूशन शुरू हुआ तो 2011 तक पहुंचते-पहुंचते हालात दिल्ली से भी बदतर हो गए थे। शहर घने ग्रे स्मॉग से ढका रहता। PM2.5 का स्तर खतरनाक हो चुका था। 2013 में बीजिंग में एक्यूआई 755 तक दर्ज किया गया। उस साल कई रिपोर्टों में बीजिंग को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर और चीन के इतिहास में सबसे प्रदूषित साल करार दिया गया था।
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दुनिया भर के मीडिया रिपोर्ट्स में बीजिंग के एयर पॉल्यूशन की चर्चा रहती। विदेशी कंपनियां निवेश करने से हिचकने लगीं। चीनी अमीर दूसरे देशों में बसने के बारे में सोचने लगे। एयर पॉल्यूशन की समस्या चीन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का कारण बन गई थी।
तब चीन ने आक्रामक, सख्त और सुनियोजित नीतियां और योजनाएं बनाईं, जिनका ही नतीजा है कि आज बीजिंग की हवा साफ हो चुकी है। AQI लेवल 100 तक आ पहुंचा है। इसी के साथ अब बीजिंग एयर पॉल्यूशन से जूझ रहे शहरों के लिए उदाहरण बन गया है।
पहले समस्या की पहचान की; फिर रणीतियां बनाई?
चीन विकास के पथ पर चला तो जीडीपी, जनसंख्या और वाहनों की संख्या तीनों बढ़ी। देखते-देखते चीन दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन गया। तेल और कोयले की खपत तेजी से बढ़ गई। सर्दियों में भारी मात्रा में कोयला का उपयोग होता।
इन सबका असर यह हुआ कि बीजिंग की हवा जहरीली हो गई। वसंत आता तो मंगोलिया से आने वाले रेत के तूफान मुश्किलों को और बढ़ा देते थे। कोविड से बहुत पहले चीन में लोग मास्क पहनकर घूमते नजर आते थे। चीन ने जब एयर पॉल्यूशन की समस्याओं की पहचान की, तब उससे निपटने की रणनीति बनाई।
क्या थीं वो नीतियां, जिनसे साफ हुई हवा?
एक्शन नंबर-1: उद्योगों को लेकर क्या प्लान बनाया?
एक्शन नंबर-2: वाहनों के लिए अपनाया यूरोपीय मॉडल
बीजिंग में स्मॉग बढ़ाने में गाड़ियों ने निकलने वाला धुआं एक बड़ा कारण था। इस पर लगाम लगाने के लिए चीन ने यूरोपीय मॉडल को फॉलो करते हुए सख्त उत्सर्जन नियम लागू किए।
एक्शन नंबर-3: क्लीन और ग्रीन एनर्जी
एक्शन नंबर-4: रियल टाइम मॉनिटरिंग, सुधार न होने पर सजा-जुर्माना
एक्शन नंबर-5: वन और हरित क्षेत्र
दिल्ली में बीजिंग जैसे कौन-से नियम तुरंत लागू किए जा सकते हैं?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पूर्व अपर निदेशक का डॉ. दीपांकर साहा बताते हैं कि बीजिंग और दिल्ली, दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र हैं। बीजिंग और दिल्ली का मौसम, सरकारी नीतियां, लोगों की आदतें और प्रशासन के काम करने का तरीका सब अलग-अलग है। चीन में तानाशाही है तो भारत में लोकतंत्र। वे शहर में एक भी अतिरिक्त गाड़ी या फिर अतिरिक्त व्यक्ति को नहीं घुसने देते हैं। भारत में ऐसा करना संभव नहीं है।
हालांकि, सर्दियों में कुछ सख्त कदम जरूरी ज़रूर लिए जा सकते हैं, जैसे-


