समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने दावे के मुताबिक शनिवार को परिवार संग राम मंदिर पहुंचकर रामलला का दर्शन-पूजन किया। सांसद के कथन के मुताबिक नंगे पांव परिवार के साथ दर्शन करने मंदिर पहुंचे थे, हालांकि ध्वजारोहण कार्यक्रम में सांसद को आमंत्रित न करने को लेकर उन्होंने मलाल जताया।राम मंदिर में 25 नवंबर को ध्वजारोहण समारोह का आयोजन था। सांसद की मानें तो समारोह में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया था,हालांकि उन्होंने दावा किया था कि समारोह के बाद नंगे पांव पहुंचकर प्रभु श्रीराम का दर्शन करेंगे। शनिवार को सांसद ने बेटे अमित प्रसाद, बहू भाग्यश्री, बेटी डॉ. अलका, पोते अधीश, निजी सचिव शशांक शुक्ल व अन्य के साथ मंदिर पहुंचकर माथा टेका और आशीर्वाद लिया। इस मौके पर सांसद ने कहा कि संसदीय मर्यादा के तहत प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में स्थानीय सांसद को आमंत्रित किया जाता है, लेकिन मुझे राम मंदिर के कार्यक्रम में मंदिर ट्रस्ट की ओर से आमंत्रित नहीं किया गया था।
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - पूर्व मुखिया के पुराग्रह वाले दंभी बोल
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली पर जन्म लेने पर मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। उन्होंने कहा कि प्रभु की कृपा से यूपी में नौ बार जनप्रतिनिधत्व का मौका मिला। उन्होंने कहा कि मंदिर भाजपा ने नहीं, बल्कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर बना है। उन्होंने कहा कि मंदिर अभी पूर्ण नहीं हुआ है। लगभग एक वर्ष का समय पूरा होने में लगेगा। उन्होंने कहा कि मुझे किस आधार पर आयेाजन में इग्नोर किया गया समझे परे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु के दर्शन के लिए किसी की अनुमति नहीं लेना होता है। जब हरि इच्छा होगी वे बुला लेंगे। आज प्रभु श्रीराम के दर्शन का संयोग बना और परिवार संग दर्शन-पूजन किया।
समारोह में नहीं बुलाने का लगाया आरोप
प्रसाद ने 25 नवंबर को आरोप लगाया था कि उन्हें अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में हुए धर्म ध्वजा स्थापना समारोह में इसलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि वह दलित हैं। एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, 'रामलला के दरबार में धर्म ध्वजा स्थापना कार्यक्रम में मुझे न बुलाए जाने का कारण मेरा दलित समाज से होना है। तो यह राम की मर्यादा नहीं, किसी और की संकीर्ण सोच का परिचय है। राम सबके हैं। मेरी लड़ाई किसी पद या निमंत्रण की नहीं, सम्मान, बराबरी और संविधान की मर्यादा की है।'



Comments