आरंग में पार्षदों का हल्लाबोल मूलभूत सुविधाओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर एक दिवसीय धरना

आरंग में पार्षदों का हल्लाबोल मूलभूत सुविधाओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर एक दिवसीय धरना

​आरंग : नगर पालिका परिषद आरंग में स्थानीय पार्षदों ने प्रशासन और अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने 25 फरवरी को नगर पालिका परिसर के बाहर गेट के सामने शांतिपूर्वक एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। ​पार्षदों का आरोप है कि पिछले 6 महीनों से नगर पालिका परिषद की कोई सामान्य सभा या बैठक आयोजित नहीं की गई है। पार्षदों ने इसे प्रशासन का 'तानाशाही रवैया' करार देते हुए कहा कि बैठक न होने के कारण शहर के विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए है। 12 सूत्रीय मांगों को रखाकर प्रदर्शन किया गया है जो निम्न प्रकार है ​रुके हुए विकास कार्य: प्रधानमंत्री आवास योजना की लंबित किस्तों का भुगतान, वृद्ध पेंशन और राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना जैसे जनहित कार्यों को तत्काल शुरू करने की मांग।

​शहर की बदहाली: सभी वार्डों में खराब स्ट्रीट लाइटों को सुधारने और साफ-सफाई की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने पर जोर।​अवैध प्लॉटिंग पर रोक: आरंग सीमा क्षेत्र के भीतर हो रही अवैध प्लॉटिंग पर तत्काल रोक लगाने और इसमें शामिल अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग। साथ ही, जारी किए गए अवैध N.O.C. को निरस्त करने की बात कही गई है।​भ्रष्टाचार का आरोप: झलमला तालाब सौंदर्यकरण कार्य में ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरतने और STFI मशीन न लगाने पर संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग।

मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है 

पार्षद निधि और बजट: विपक्ष हेतु बैठक की उचित व्यवस्था और सामान्य सभा की तत्काल बैठक बुलाने की मांग। ​
धरने में मुख्य रूप से नेता प्रतिपक्ष शरद गुप्ता,पाषर्द गण ईश्वर पटेल , खिलावन निषाद, दीक्षा सूरज सोनकर समीर गौरी,पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष चंद्रशेखर चन्द्राकर, चंद्रकला साहू , मंगलमूर्ति अग्रवाल,बृजेन्द्र लोधी, मंडल अध्यक्ष भरत लोधी, अलोक शर्मा, अमन भाटी, राजेश्वरी साहू , गणेश बांधे, लक्की जलछत्री, दीपक चन्द्राकर, कुलदीप लोधी , सलमान खान, सतीश लोधी, सादिक बेलीम,पन्ना खेलवार , मोहन साहिनी,सागर जोशी और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहे।​पार्षदों का कहना है कि उन्होंने इससे पहले 18 फरवरी 2026 को भी ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी थी लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण उन्हें आज धरने पर बैठने को मजबूर होना पड़ा। यदि 15 दिन में 12 बिंदुओं पर विचार नही की गईं तो आने वाले समय में उग्र आंदोलन व नगर पालिका परिषद का घेराव की चेतावनी भी दी गई है।








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