किसी भी रिश्ते में थोड़ा-बहुत नोक-झोक होना सामान्य है, लेकिन जब ये नोक-झोक रोज के झगड़ों में बदल जाए, तो मानसिक शांति खत्म होने लगती है।अक्सर हम अपने पार्टनर को दोषी ठहराते हैं, पर कई बार समस्या हमारे व्यवहार की उन बारीकियों में छिपी होती है जिन्हें हम देख नहीं पाते। अगर आपके रिश्ते में भी कड़वाहट बढ़ रही है, तो हो सकता है कि आप अनजाने में ये 5 गलतियां कर रहे हों।
बातचीत की कमी
रिश्ते टूटने या बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह कम्युनिकेशन गैप है। कई बार हम मान लेते हैं कि पार्टनर हमारी खामोशी या हमारे मन की बात बिना कहे समझ जाएगा। जब ऐसा नहीं होता, तो निराशा और गुस्सा पैदा होता है। अपनी भावनाओं को साफ और शांत तरीके से जाहिर न करना गलतफहमियों को जन्म देता है, जो बाद में बड़े झगड़े का कारण बनती हैं।
पुरानी बातों को बीच में लाना
झगड़े के दौरान अक्सर लोग वर्तमान मुद्दे को छोड़कर पुरानी गलतियों का पिटारा खोल देते हैं। इससे घाव भरने के बजाय फिर से हरे हो जाते हैं। जब आप पुरानी बातों को ढाल बनाते हैं, तो पार्टनर को लगता है कि आपने उन्हें कभी माफ ही नहीं किया। इससे समाधान निकलने के बजाय बहस लंबी खिंचती चली जाती है।
मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
मैं सही और तुम गलत की जिद
रिलेशनशिप एक टीम वर्क है, कोई कॉम्प्टिशन नहीं। झगड़े के दौरान अक्सर हमारा ध्यान इस बात पर होता है कि हमें खुद को सही साबित करना है। अपनी गलती न मानना और हर बात का दोष पार्टनर पर मढ़ देना रिश्ते की नींव को कमजोर करता है।
दूसरों से तुलना करना
सोशल मीडिया के दौर में हम अक्सर दूसरों के परफेक्ट रिश्तों को देखकर अपने पार्टनर की तुलना उनसे करने लगते हैं। इससे पार्टनर के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचती है। हर व्यक्ति और हर रिश्ता अलग होता है। तुलना करने से रिश्ते में सम्मान कम होने लगता है और असुरक्षा की भावना बढ़ती है।
पर्सनल स्पेस का सम्मान न करना
रिश्ते में जुड़ाव जरूरी है, लेकिन पर्सनल स्पेस की कमी घुटन पैदा कर सकती है। पार्टनर के हर काम पर नजर रखना, उनके फोन चेक करना या उन्हें दोस्तों-परिवार से मिलने से रोकना अविश्वास का संकेत है। जब किसी व्यक्ति को अपनी आजादी छिनती हुई महसूस होती है, तो वह चिड़चिड़ा हो जाता है, जिससे बेवजह के झगड़े शुरू हो जाते हैं।
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