भारत-इजरायल के बीच 16 समझौतों पर हस्ताक्षर, बोले पीएम जल्द फ्री ट्रेड डील संभव

भारत-इजरायल के बीच 16 समझौतों पर हस्ताक्षर, बोले पीएम जल्द फ्री ट्रेड डील संभव

प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल दौरे का आज आखिरी दिन हैं। मोदी दौरे के दूसरे दिन सबसे पहले यरूशलम के होलोकॉस्ट मेमोरियल ‘याद वाशेम’ पहुंचे। यहां उन्होंने हिटलर के नाजी शासन में मारे गए 60 लाख यहूदियों को श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद इजराइली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से मुलाकात की। इस दौरान इसाक ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ी है, जो पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही है। वहीं, पीएम मोदी ने इजराइली राष्ट्रपति को भारत आने का न्योता दिया।

फिर पीएम मोदी और इजराइली पीएम नेतन्याहू ने द्विपक्षीय मीटिंग के बाद जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान बताया गया है कि इजराइल में भी अब भारत का UPI पेमेंट सिस्टम चलेगा। PM मोदी ने कहा कि भारत जल्द इजराइल के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) करेगा।

मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है 

मोदी बुधवार को इजराइल पहुंचे थे। नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने एयरपोर्ट पर मोदी को रिसीव किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने इजराइली संसद नेसेट को भी संबोधित किया। उन्हें संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ दिया गया। मोदी नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।

पीएम मोदी के संबोधन की 7 बड़ी बातें…

  1. इजराइल में स्वागत पर- मोदी ने इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और वहां की जनता का गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए धन्यवाद दिया। नेसेट (इजराइली संसद) से मिले सम्मान को उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों और भारत-इजराइल दोस्ती को समर्पित किया।
  2. भारत-इजराइल रिश्ते और मजबूत होंगे- दोनों देशों के रिश्ते भरोसे, लोकतंत्र और इंसानी मूल्यों पर बने हैं। अब इस रिश्ते को स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप का दर्जा देने का फैसला हुआ है। यह दोनों देशों के लोगों की उम्मीदों को दर्शाता है।
  3. व्यापार और टेक्नोलॉजी में सहयोग- दोनों देश व्यापार और निवेश बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। जल्द ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पूरा करने की कोशिश होगी। AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिज जैसे क्षेत्रों में साथ काम होगा। इजराइल में UPI इस्तेमाल के लिए समझौता हुआ है।
  4. रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा सहयोग- रक्षा क्षेत्र में दोनों दोशों का भरोसेमंद सहयोग है, जिसे और बढ़ाया जाएगा। जॉइंट डेवलपमेंट, प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर काम होगा। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और स्पेस सेक्टर में भी साझेदारी बढ़ेगी।
  5. किसानों और गांवों के लिए नई पहल- कृषि क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग पहले से सफल रहा है। भारत में इजराइल की मदद से बने सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस की संख्या 100 तक बढ़ाई जाएगी। गांव-गांव तक नई खेती तकनीक पहुंचाने के लिए “विलेज ऑफ एक्सीलेंस” बनाए जाएंगे। इससे किसानों की आय और उत्पादन बढ़ेगा।
  6. लोगों और युवाओं को जोड़ने पर जोर- भारतीय कामगारों ने इजराइल में मेहनत से भरोसा जीता है। अब सहयोग को कॉमर्स और सर्विस सेक्टर तक बढ़ाया जाएगा। युवाओं और रिसर्चर्स को जोड़ने के लिए इंडिया-इजराइल अकादमिक फोरम बनेगा।
  7. वैश्विक मुद्दों पर साझेदारी- दोनों देशों ने IMEC कॉरिडोर और I2U2 ग्रुप जैसे प्रोजेक्ट आगे बढ़ाने पर चर्चा की। भारत और इजराइल का साफ संदेश है, दुनिया में आतंकवाद की कोई जगह नहीं। पश्चिम एशिया में शांति भारत के लिए भी जरूरी है, इसलिए भारत संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।

भारत-इजराइल में FTA पर बातचीत का पहला दौर पूरा

भारत और इजराइल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत का पहला दौर पूरा हो गया है। यह 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ था और यह 26 फरवरी 2026 तक चला।

नवंबर 2025 में दोनों देशों ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर साइन किए थे, जिससे यह तय हुआ कि किन मुद्दों पर बातचीत होगी और कैसे आगे बढ़ा जाएगा। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल सामान का व्यापार 3.62 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 31 हजार करोड़ रुपए रहा।

दोनों देश कई क्षेत्रों में एक-दूसरे के लिए फायदेमंद हैं। यह एफटीए दोनों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद करेगा और कारोबारियों, खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों को ज्यादा भरोसा और स्थिरता देगा।

इस बातचीत के दौरान दोनों देशों के एक्सपर्ट्स अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इनमें गुड्स एंड सर्विसेज का व्यापार, रूल्स ऑफ ओरिजन, हेल्थ और पौधों से जुड़े नियम, व्यापार में आने वाली तकनीकी रुकावटें, कस्टम प्रोसेस, व्यापार को आसान बनाने के उपाय और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स जैसे मुद्दे शामिल हैं।

हिटलर के शासन में मारे गए यहूदियों की याद में बना ‘यद वाशेम’ स्मारक

याद वाशेम होलोकॉस्ट के दौरान मारे गए लाखों यहूदियों की याद में बनाया गया है। यह स्मारक इजराइल की राजधानी यरुशलम में स्थित है और हर साल दुनिया भर से लोग यहां आकर इतिहास को समझते हैं और श्रद्धांजलि देते हैं।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर ने लगभग 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी थी। इस नरसंहार को होलोकॉस्ट कहा जाता है। इजराइल की संसद नेसेट ने साल 1953 में फैसला किया कि होलोकॉस्ट में मारे गए लोगों की याद में एक खास स्मारक बनाया जाए।

बाद में 2005 में यहां एक आधुनिक संग्रहालय खोला गया, ताकि आने वाली पीढियां इस त्रासदी को समझ सकें। याद वाशेम परिसर में होलोकॉस्ट संग्रहालय, हॉल ऑफ नेम्स, बच्चों का स्मारक और राइटियस अमंग द नेशंस गार्डन जैसी जगहें मौजूद हैं। यहां असली दस्तावेज, तस्वीरें और पीडितों की व्यक्तिगत कहानियां सुरक्षित रखी गई हैं।

याद वाशेम नाम का अर्थ है याद और नाम, यानी जिन लोगों को मिटाने की कोशिश की गई, उनकी याद हमेशा जिंदा रहे।








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