रायपुर : माना-तूता क्षेत्र के जंगलों को बचाने के लिए चलाए जा रहे जनआंदोलन का आज तीसरा दिन व्यापक जनसमर्थन और दृढ़ संकल्प के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, महिलाओं एवं स्कूली छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर जंगल संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक सत्यनारायण शर्मा जी एवं पूर्व विधायक धनेन्द्र साहू मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। दोनों वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि फिल्मसिटी निर्माण के नाम पर की जा रही जंगलों की कटाई पर्यावरण, जैव विविधता और स्थानीय जनजीवन के लिए अत्यंत घातक है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रस्तावित फिल्मसिटी परियोजना को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए तथा माना-टूटा के जंगलों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए।
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पंकज शर्मा ने कहा कि वृक्षों की अंधाधुंध कटाई मानव जीवन के लिए सीधा खतरा है। यदि जंगल नष्ट होंगे तो जलवायु असंतुलन, जलसंकट और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएँ बढ़ेंगी। हमे विकास से परेशानी नहीं है, हमे परेशानी है वृक्षों की कटाई से । रायपुर शहर जिला अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन जी ने कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश स्वीकार्य नहीं है और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार को तुरंत इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।रायपुर ग्रामीण जिला अध्यक्ष पप्पू बंजारे जी ने कहा कि ये जंगल क्षेत्र की जलवायु संतुलन, भूजल संरक्षण और पर्यावरणीय सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए किसी भी स्थिति में वृक्षों की कटाई नहीं होने दी जाएगी।
इस अवसर पर पूर्व पार्षद जसवीर सिंह ढिल्लन , जनपद सदस्य कृणाल सिन्हा , जनपद सदस्य सरिका गोवर्धन साहू , पूर्व सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग किरण सिन्हा , युवा कांग्रेस पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष संजमन बाग ब्लॉक अध्यक्ष हीरेंद्र देवांगन, प्रवीण साहू, चपालाल देवांगन , गोपाल प्रसाद वाजपेयी , सुरेश धीवर , चंदन साहू , लक्की यादव , मानसिंह गिलहरे, गंगाधर गिलहरे , संजय पटेल, गजेंद्र साहू, सहित अनेक गणमान्य नागरिक, ग्रामीणजन एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।महिलाओं एवं विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की उल्लेखनीय सहभागिता ने यह स्पष्ट किया कि यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा का सामूहिक संकल्प है। सभी उपस्थितजनों ने वृक्षों पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा का प्रण लिया।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक वृक्षों की कटाई पर पूर्ण रोक नहीं लगाई जाती और जंगलों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह जनआंदोलन निरंतर जारी रहेगा।
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