आज रखा जाएगा रवि प्रदोष व्रत,इस विधि से करें पूजा, जानें भोग, मंत्र से लेकर सबकुछ

आज रखा जाएगा रवि प्रदोष व्रत,इस विधि से करें पूजा, जानें भोग, मंत्र से लेकर सबकुछ

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत ज्यादा महत्व है। यह भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। जब यह व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष कहा जाता है। रवि प्रदोष का व्रत रखने से भगवान शिव खुश होते हैं। साथ ही कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इस बार रवि प्रदोष व्रत 01 मार्च यानी आज के दिन रखा जा रहा है। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

पूजा विधि 

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान शिव व सूर्य देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  2. सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य जरूर दें।
  3. सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है।
  4. इस समय दोबारा स्नान कर साफ कपड़े पहनें।
  5. शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
  6. इसके बाद चंदन का लेप लगाएं और बिल्व पत्र, धतूरा व मदार के फूल अर्पित करें।
  7. मंदिर में गाय के घी का दीपक जलाएं और शिव चालीसा या 'रुद्राष्टकम' का पाठ करें।
  8. शिव जी के मंत्रों का जप व रवि प्रदोष व्रत कथा का पाठ जरूर करें।
  9. अंत में आरती करें।

रवि प्रदोष पूजन मंत्र 

  1. ॐ नमः शिवाय॥
  2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः॥
  3. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
  4. उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥

भगवान शिव का प्रिय भोग 

भगवान भोलेनाथ बहुत भोले हैं, वे केवल जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन रवि प्रदोष पर उन्हें खीर या पंचामृत का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इस बार प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इस दिन गुड़ से बनी चीजों का भी भोग जरूर लगाएं। साथ ही इसका दान करें।

ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है 

रवि प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति रवि प्रदोष का व्रत करता है, उसे लंबी उम्र, अच्छी सेहत का वरदान मिलता है। साथ ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए चमत्कारी है, जो सरकारी नौकरी या प्रशासनिक सेवाओं में सफलता चाहते हैं।

।।शिवजी की आरती।।

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

 एकानन चतुरानन पंचानन राजे।

हंसासन गरूड़ासन, वृषवाहन साजे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

दो भुज चार चतुर्भुज, दसभुज अति सोहे ।

त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

श्वेताम्बर पीताम्बर, बाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिक, भूतादिक संगे ॥

 ॐ जय शिव ओंकारा...

कर के मध्य कमंडल, चक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारी, जगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, जानत अविवेका।

प्रणवाक्षर में शोभित, ये तीनों एका ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

त्रिगुणस्वामी जी की आरति, जो कोइ नर गावे।

कहत शिवानंद स्वाम, सुख संपति पावे ॥

ॐ जय शिव ओंकारा...

पार्वती जी की आरती

जय पार्वती माता जय पार्वती माता।

ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता॥

जय पार्वती माता...

अरिकुल पद्म विनाशिनि जय सेवक त्राता।

जग जीवन जगदंबा, हरिहर गुण गाता॥

जय पार्वती माता...

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा।

देव वधू जस गावत, नृत्य करत ताथा॥

जय पार्वती माता...

सतयुग रूपशील अतिसुन्दर, नाम सती कहलाता।

हेमांचल घर जन्मी, सखियन संग राता॥

 जय पार्वती माता...

शुम्भ-निशुम्भ विदारे, हेमांचल स्थाता।

सहस्त्र भुजा तनु धरि के, चक्र लियो हाथा॥

जय पार्वती माता...

सृष्टि रूप तुही है जननी शिवसंग रंगराता।

नन्दी भृंगी बीन लही सारा जग मदमाता॥

जय पार्वती माता...

देवन अरज करत हम चित को लाता।

गावत दे दे ताली, मन में रंगराता॥

जय पार्वती माता...

श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता।

 सदासुखी नित रहता सुख सम्पत्ति पाता॥

जय पार्वती माता...








You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments