धनिया की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन अक्सर किसानों को इसके अंकुरण (Germination) को लेकर बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सही जानकारी के अभाव में केवल 30 से 40 प्रतिशत बीज ही उग पाते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है। राजस्थान के एक प्रगतिशील किसान राजुलाल जी मीणा ने धनिया उगाने की एक ऐसी तकनीक साझा की है, जिससे भीषण गर्मी में भी धनिया का बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।
धनिया के कम अंकुरण के मुख्य कारण और चुनौतियां
धनिया उगाने में सबसे बड़ी समस्या तापमान की होती है। बढ़ते तापमान के कारण बीज ठीक से अंकुरित नहीं हो पाते। कई किसान बाजार से बीज लाकर सीधे खेत में डाल देते हैं, जो कि गलत तरीका है। साबुत धनिया (Whole seeds) कभी भी खेत में सीधे नहीं डालना चाहिए क्योंकि इसके अंकुरित होने की संभावना बहुत कम होती है। इसके अलावा, खेत की तैयारी और सिंचाई का सही समय पता न होना भी उत्पादन घटने का मुख्य कारण है।
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बीज का सही चुनाव और शोधन की प्रक्रिया
सफल पैदावार के लिए हमेशा बीज को दो टुकड़ों में तोड़कर (धनिया की दाल) ही इस्तेमाल करना चाहिए। वैरायटी का चुनाव अपने क्षेत्र के तापमान के अनुसार करें। बुआई से पहले बीज को लगभग 8 घंटे तक साधारण पानी में भिगोकर रखें। ध्यान रहे कि बीज 8 घंटे से अधिक न भीगें। भिगोने के बाद उन्हें एक सूती कपड़े पर फैला दें ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए।
कोकोपीट और फ्रिज तकनीक से बढ़ाएं अंकुरण क्षमता
धनिया के बीजों को उपचारित करने के लिए 1 किलो बीज में 250 ग्राम कोकोपीट मिलाएं। यदि कोकोपीट उपलब्ध न हो, तो 500 ग्राम अच्छी तरह सड़ी हुई और छानी हुई गोबर की खाद का उपयोग कर सकते हैं। इस मिश्रण को एक पोटली में बांधकर 2-3 मिनट के लिए पानी में डुबोएं और फिर इसे फ्रिज के निचले हिस्से (फ्रीजर में नहीं) में 5 से 6 घंटे के लिए रख दें। यह प्रक्रिया गर्मी के मौसम में भी बीजों को अंकुरित होने के लिए अनुकूल वातावरण देती है।
बुआई की सही विधि और गहराई का महत्व
खेत में बुआई करते समय ध्यान रखें कि मिट्टी में बहुत ज्यादा नमी न हो। बीजों को खेत में छिड़कने के बाद हल्का कल्टीवेटर चलाएं या हाथों से मिट्टी में मिला दें। बीजों को बहुत ज्यादा गहराई में न डालें, अन्यथा वे उग नहीं पाएंगे। यदि आप क्यारियों में बुआई कर रहे हैं, तो सिंचाई प्रबंधन का विशेष ध्यान रखें। पहली सिंचाई के बाद दूसरी सिंचाई 5वें दिन करें। फव्वारा विधि (Sprinkler) का उपयोग करने पर शुरुआत में 4-5 घंटे और फिर तीसरे दिन 2 घंटे फव्वारे चलाएं।
खाद, उर्वरक और रोग प्रबंधन का सही गणित
बेहतर फसल के लिए बेसल डोज (Basal Dose) के रूप में प्रति एकड़ 1 बैग डीएपी (DAP), 1 बैग सिंगल सुपर फास्फेट (SSP) और 10 किलो कार्बोफ्यूरान का इस्तेमाल करें। कार्बोफ्यूरान जड़ से जुड़ी समस्याओं और निमेटोड को खत्म करता है, जिससे पौधा पीला नहीं पड़ता। फसल के बढ़ने पर शुरुआती चरणों में 19:19:19 और बाद में 00:52:34 का छिड़काव करें। समय-समय पर हल्का कीटनाशक और फफूंदनाशक स्प्रे करते रहें।
धनिया की कटाई और मार्केटिंग के लिए जरूरी सुझाव
धनिया की फसल बुआई के लगभग 35 दिनों बाद पहली कटाई (हार्वेस्टिंग) के लिए तैयार हो जाती है। हमेशा सुबह के समय ही धनिया उखाड़ें। फसल की कटाई करने के बजाय पूरे पौधे को जड़ समेत उखाड़कर मंडी ले जाएं, इससे वजन भी ज्यादा मिलता है और मंडी में भाव भी अच्छा रहता है। शाम को उखाड़ा गया धनिया मंडी पहुँचते-पहुँचते मुरझा जाता है, इसलिए ताजगी बनाए रखने के लिए सुबह की हार्वेस्टिंग ही सबसे उत्तम है।
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