एमसीबी/मनेन्द्रगढ़ : वर्षों की प्रतीक्षा, अनगिनत उम्मीदें और लंबा जन-संघर्ष—अब साकार होने जा रहा है। मनेन्द्रगढ़ की धरती पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना केवल एक शासकीय घोषणा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय उपेक्षा के खिलाफ जीत की ऐतिहासिक गाथा है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक श्याम बिहारी जायसवाल की पहल से यह महत्वाकांक्षी परियोजना अब धरातल पर उतर चुकी है। यह मेडिकल कॉलेज न केवल इलाज का बड़ा केंद्र बनेगा, बल्कि शिक्षा, रोजगार और अर्थव्यवस्था के लिहाज से पूरे कोयलांचल अंचल की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा।
पृष्ठभूमि: उपेक्षा से उम्मीद तक
मनेन्द्रगढ़ और आसपास का हसदेव-कोयलांचल क्षेत्र दशकों तक ‘रेफरल सेंटर’ की पहचान से जूझता रहा है। गंभीर मरीजों को 200 से 400 किलोमीटर दूर बिलासपुर या नागपुर रेफर करना मजबूरी थी। कई बार रास्ते में ही दम तोड़ देने वाले मरीजों की घटनाओं ने बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की मांग को जन्म दिया।
संघर्ष के प्रमुख चरण
1.
अविभाजित मध्य प्रदेश और प्रारंभिक छत्तीसगढ़ काल में स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग तेज।
2.
2000 से 2020 तक जन-आंदोलन – धरना-प्रदर्शन, पदयात्राएं, ज्ञापन; लेकिन बजट और तकनीकी कारणों से फाइलें ठंडे बस्ते में।
3.
2022 में नया जिला गठन – मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला (एमसीबी) बनने के बाद मेडिकल कॉलेज की आवश्यकता अनिवार्य हुई।
4.
2023-24: निर्णायक पहल – स्वास्थ्य मंत्री पद संभालते ही जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा।
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परियोजना की प्रगति:
कागज से जमीन तक,
मेडिकल कॉलेज हेतु भूमि चिन्हांकन पूर्ण,
शासन स्तर पर करोड़ों की राशि स्वीकृत
अस्पताल विस्तार और मास्टर प्लान तैयार
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना विकसित
स्वास्थ्य मंत्री का स्पष्ट कथन —
“यह मेरा नहीं, मनेन्द्रगढ़ की जनता के विश्वास का प्रतिफल है। इलाज के अभाव में अपनों को खोने की पीड़ा अब इतिहास बनेगी।”
विकास का मल्टीप्लायर इफेक्ट
1️⃣ स्वास्थ्य क्रांति
जटिल सर्जरी और गंभीर बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर,
कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाओं की तैयारी।
‘रेफरल सेंटर’ की पहचान से मुक्ति
2️⃣ शिक्षा का नया केंद्र
आदिवासी और ग्रामीण छात्रों को घर के पास MBBS की सुविधा,
चिकित्सा शिक्षा का नया हब।
3️⃣ रोजगार और अर्थव्यवस्था -
डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल में प्रत्यक्ष रोजगार।
होटल, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल स्टोर, रियल एस्टेट में अप्रत्यक्ष अवसर तथा
शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार।
क्या होगी भविष्य की तस्वीर?
मनेन्द्रगढ़ की पहचान अब पिछड़े अंचल के रूप में नहीं, बल्कि हेल्थ और एजुकेशन हब के रूप में स्थापित होगी। यह परियोजना सरगुजा संभाग के सबसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में से एक के रूप में उभरेगी और आने वाले दशकों में क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनेगी।
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